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लगातार बारिश से धान की फसल को नुकसान की आशंका, किसानों को सतर्क रहने की सलाह खेतों से तत्काल जल निकासी करें किसान, धान में पौध गिरने, दाने काले पड़ने एवं फफूंदजनित रोगों से बचाव के लिए अपनाएं जरूरी उपाय

 हम भारती न्यूज़ मंडल व्यूरो चीफ राजेश्वर सिंह सभल से खास खबर



लगातार बारिश से धान की फसल को नुकसान की आशंका, किसानों को सतर्क रहने की सलाह


खेतों से तत्काल जल निकासी करें किसान, धान में पौध गिरने, दाने काले पड़ने एवं फफूंदजनित रोगों से बचाव के लिए अपनाएं जरूरी उपाय


सम्भल (बहजोई), 06 सितम्बर 2026

जनपद सम्भल में पिछले कई दिनों से लगातार हो रही बारिश को देखते हुए अगेती धान की फसल में नुकसान की संभावना बनी हुई है। बारिश के साथ तेज हवा चलने पर निकलती हुई बालियों तथा दाना भरने की अवस्था वाली धान की फसल के पौधे गिर सकते हैं। इससे पौध सड़न, दाने काले पड़ने, परागण प्रभावित होने तथा विभिन्न फफूंदजनित रोगों के प्रकोप की संभावना बढ़ जाती है।

उप कृषि निदेशक अरुण कुमार त्रिपाठी ने बताया कि किसान भाई सबसे पहले खेतों में जलभराव न होने दें तथा खेत से अतिरिक्त पानी की तत्काल निकासी सुनिश्चित करें। यदि धान के पौधे गिर गए हैं तो उन्हें बाली के नीचे से बांध दें। गिरे हुए पौधों में सड़न की समस्या दिखाई देने पर कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि लगातार बारिश के मौसम में धान की निकलती हुई बालियों में परागण प्रभावित हो सकता है तथा दाने काले पड़ने के साथ अन्य फफूंदजनित रोग भी लग सकते हैं। अधिक नमी तथा लगभग 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान की स्थिति में धान में हल्दिया कंडवा रोग के प्रकोप की संभावना बढ़ जाती है। खेत में यूरिया का अत्यधिक प्रयोग करने पर इस रोग का प्रकोप तेजी से बढ़ सकता है। रोग के फफूंद बीजाणु हवा के माध्यम से स्वस्थ पौधों तक भी पहुंच सकते हैं।

हल्दिया कंडवा रोग के प्रकोप में दानों का आकार असामान्य रूप से बढ़ने लगता है तथा उनका रंग बदलकर बाद में काला पड़ सकता है। प्रभावित दाने खोखले हो जाते हैं और उनका वजन भी कम हो जाता है।

उप कृषि निदेशक ने बताया कि इस रोग से बचाव के लिए धान की बुवाई से पूर्व कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीज उपचार करना चाहिए। किसानों को संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। यदि खेत के किसी हिस्से में संक्रमित बालियां दिखाई दें तो उन्हें तत्काल खेत से निकालकर जमीन में गाड़ दें अथवा सुरक्षित तरीके से नष्ट कर दें।

रोग नियंत्रण के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यू.पी. 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी, अथवा टेबुकोनाजोल 25.9 प्रतिशत ई.सी. 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी, अथवा हेक्साकोनाजोल 5 प्रतिशत एस.सी. 1 से 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से बालियां निकलने से पूर्व छिड़काव करने की सलाह दी गई है।


जिलाधिकारी अंकित खण्डेलवाल ने कहा कि लगातार बारिश के कारण धान की फसल में जलभराव एवं रोगों की संभावना को देखते हुए किसानों को समय रहते आवश्यक सावधानियां बरतनी चाहिए। किसान खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी तत्काल सुनिश्चित करें और फसल में किसी भी प्रकार के रोग या नुकसान के लक्षण दिखाई देने पर कृषि विभाग के अधिकारियों एवं विशेषज्ञों से सलाह लेकर आवश्यक उपचार करें।

   जारी जिला सूचना कार्यालय सम्भल

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