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मंडल व्यूरो चीफ राजेश्वर सिंह
संभल से खास खबर
सम्भल की कृषि उपज को मिलेगी वैश्विक पहचान, आलू निर्यात के लिए किसानों को किया जा रहा तैयार
मेंथा-बासमती के बाद आलू पर फोकस, पात्र निर्यातकों को परिवहन अनुदान और 50 हेक्टेयर के क्लस्टर पर मिलेगा 10 लाख रुपये का प्रोत्साहन
सम्भल। जनपद सम्भल की कृषि उपज को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने तथा कृषि निर्यात को नई गति देने के लिए विभागीय स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जिले से वर्तमान में मुख्य रूप से मेंथा एवं बासमती चावल का निर्यात हो रहा है। वहीं, जनपद में बड़े पैमाने पर होने वाले आलू उत्पादन को देखते हुए अब आलू के निर्यात को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), निर्यातकों तथा संबंधित विभागों के समन्वय से कृषि निर्यात की पूरी श्रृंखला विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
निर्यातकों को मिलेगा परिवहन अनुदान
कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार विभाग के माध्यम से उत्तर प्रदेश कृषि निर्यात नीति-2019 के अंतर्गत कृषि उत्पादों के निर्यात पर पात्र निर्यातकों को परिवहन अनुदान की सुविधा उपलब्ध है। वर्तमान में मेंथा एवं बासमती चावल का निर्यात कर रही पात्र निर्यातक फर्में निर्धारित प्रक्रिया एवं आवश्यक अभिलेखों के साथ आवेदन कर योजना का लाभ प्राप्त कर सकती हैं। एक निर्यातक फर्म को एक वर्ष में अधिकतम 20 लाख रुपये तक परिवहन अनुदान दिए जाने का प्रावधान है।
कृषि विपणन निरीक्षक अवनीश कुमार सिंह ने बताया कि परिवहन अनुदान से निर्यातकों की लागत कम करने में मदद मिलेगी तथा कृषि उत्पादों को दूरस्थ एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना अधिक सुगम होगा। उन्होंने पात्र निर्यातकों से योजना की जानकारी प्राप्त कर इसका अधिकतम लाभ उठाने की अपील की।
50 हेक्टेयर के क्लस्टर पर 10 लाख रुपये का अतिरिक्त प्रोत्साहन
आलू सहित अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए किसानों को क्लस्टर आधारित उत्पादन से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। विभाग के अनुसार, एक विकासखंड के अंतर्गत 50 हेक्टेयर क्षेत्र में क्लस्टर बनाकर कुल उत्पादन का कम से कम 30 प्रतिशत निर्यात करने पर 10 लाख रुपये का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिए जाने की व्यवस्था है।
क्लस्टर के माध्यम से किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, भंडारण तथा निर्यात बाजार से जोड़ना आसान होगा। साथ ही, एफपीओ की भूमिका मजबूत होने से किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा।
एफपीओ को निर्यातक बनाने की तैयारी
जनपद के किसान उत्पादक संगठनों को कृषि निर्यात से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। सम्भल स्वर्णिम पोटैटो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड तथा सीएससी सरसी यूपी एग्रीकल्चर फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी द्वारा आलू का ऑनलाइन व्यापार दिल्ली सहित अन्य दूरस्थ क्षेत्रों में किया जा रहा है। दोनों एफपीओ निकट भविष्य में आलू के निर्यात की दिशा में भी प्रयासरत हैं।
इसके अलावा कुछ एफपीओ को बासमती के क्लस्टर के लिए तैयार किया जा रहा है। सीएससी सरसी यूपी एग्रीकल्चर फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के सीईओ मोहम्मद फहीम ने हैदराबाद में आयोजित कृषि निर्यात प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभाग कर निर्यात प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज, गुणवत्ता मानकों एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की है।
बहरीन पहुंच चुका है सम्भल का आलू
जनपद में आलू निर्यात की संभावनाओं को देखते हुए गत वर्ष विभागों एवं जिला प्रशासन के समन्वित प्रयासों से पहली बार सम्भल से आलू की खेप बहरीन भेजी गई थी। जिलाधिकारी द्वारा निर्यात वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया था। यह पहल जनपद में आलू निर्यात की संभावनाओं की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।
अब विभाग का प्रयास है कि इस पहल को आगे बढ़ाते हुए अधिक से अधिक किसानों एवं एफपीओ को निर्यात प्रक्रिया से जोड़ा जाए, ताकि सम्भल का आलू नियमित रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सके।
जनप्रतिनिधियों ने भी निर्यात बढ़ाने पर दिया जोर
कृषि निर्यात की संभावनाओं को लेकर कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार विभाग के निरीक्षक अवनीश कुमार सिंह ने जनपद के जनप्रतिनिधियों से भेंट कर विभागीय योजनाओं एवं कृषि निर्यात नीति की जानकारी दी तथा विभागीय बुकलेट उपलब्ध कराई।
विधायक इकबाल महमूद ने कहा कि सम्भल में आलू का उत्पादन बड़े क्षेत्रफल में होता है। ऐसे में आलू के निर्यात की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने आलू के साथ मेंथा एवं बासमती चावल के निर्यात को भी बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
वहीं, राज्य मंत्री गुलाब देवी ने कृषि निर्यात को किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए निर्यातकों से कृषि निर्यात नीति-2019 के अंतर्गत उपलब्ध परिवहन अनुदान का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि कृषि निर्यात बढ़ने से किसानों को बेहतर बाजार एवं उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा तथा सम्भल की कृषि उपज को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए गुणवत्ता पर विशेष जोर
मुख्य विकास अधिकारी गोरखनाथ भट्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अधिक से अधिक किसानों एवं एफपीओ को निर्यात प्रक्रिया, गुणवत्ता मानकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में टिकाऊ स्थान बनाने के लिए कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण है।
उन्होंने किसानों को उर्वरकों एवं कृषि रसायनों का वैज्ञानिक एवं संतुलित प्रयोग करने के लिए जागरूक करने पर जोर दिया, ताकि कृषि उत्पाद अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरे उतर सकें।
किसानों को स्थानीय के साथ वैश्विक बाजार से जोड़ने की पहल
जिलाधिकारी श्री अंकित खण्डेलवाल द्वारा संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि निर्यात क्लस्टर बनाने पर जोर दिया जाए, जिससे जनपद सम्भल के किसानों को निर्यात योजना के अंतर्गत उपलब्ध प्रोत्साहन का लाभ मिल सके तथा जनपद की पहचान देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी स्थापित हो।
उन्होंने कहा कि सम्भल में आलू, मेंथा एवं बासमती चावल के साथ अन्य कृषि उत्पादों को भी निर्यात से जोड़ने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। किसानों को एफपीओ के माध्यम से संगठित कर गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, भंडारण और निर्यात मानकों की जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य किसानों को केवल स्थानीय बाजार तक सीमित रखने के बजाय उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना है। कृषि निर्यात में वृद्धि से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने के साथ-साथ जनपद सम्भल की कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
