हम भारती न्यूज़ मंडल व्यूरो चीफ राजेश्वर सिंह संभल से खास खबर
एनआरएलएम से बदली संभल की नजराना की तकदीर: हैंडलूम से बुनी कामयाबी, 10 महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर*
–डेढ़ लाख रुपये की वित्तीय मदद से खड़ी की दरी और हैंडलूम इकाई, बिहार और गुरुग्राम के सरस मेलों में 10 लाख तक के उत्पाद बेचे
–डॉक्टर बनने की चाह रखने वाली 22 वर्षीय युवती ने संभाली परिवार की विरासत, साथी महिलाओं को हर महीने दिला रहीं 8 हजार रुपये की आय
संभल। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) योजना ग्रामीण महिलाओं की तकदीर संवार रही है। संभल जिले के असमोली क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गम्मनपुरा (शहबाजपुर कला) की 22 वर्षीय नजराना इसकी मिसाल बनकर उभरी हैं। मेडिकल की तैयारी के साथ-साथ नजराना ने एनआरएलएम के तहत 'भारतीय स्वयं सहायता समूह' का गठन किया और 1.50 लाख रुपये का सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) ऋण लेकर हैंडलूम व बुनकरी का काम शुरू किया। महज 14-15 महीनों के भीतर उन्होंने न केवल 8 से 10 लाख रुपये मूल्य के उत्पादों का कारोबार किया, बल्कि गांव की 10 अन्य महिलाओं को जोड़कर उन्हें 8,000 रुपये प्रति माह तक की आमदनी का जरिया भी उपलब्ध कराया।
पढ़ाई के साथ संभाली पिता की विरासत
बीएससी और जीएनएम पूरा कर चुकीं नजराना भविष्य में एमबीबीएस की तैयारी में जुटी हैं। उनके पिता वर्ष 2008 से स्वयं सहायता समूह से जुड़कर काम कर रहे थे। उन्हीं से प्रेरणा लेकर नजराना ने वर्ष 2025 में 'भारतीय स्वयं सहायता समूह' की नींव रखी। उन्होंने पारंपरिक हथकरघा को अपना जरिया बनाया और दरी, चादर, पायदान तथा तौलिया निर्माण की खड्डियां लगाईं। धीरे-धीरे उन्होंने अपने व्यवसाय का दायरा बढ़ाते हुए अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं की आपूर्ति भी शुरू की।
राज्य स्तरीय सरस मेलों में बिखेरी चमक
प्रशासन और एनआरएलएम के सहयोग से नजराना को बड़े मंचों पर उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर मिला। पटना (बिहार), गुरुग्राम (हरियाणा) और हिमाचल प्रदेश में आयोजित सरस मेलों में उनके समूह के उत्पादों को भरपूर सराहना मिली। पटना मेले में उन्होंने 5 लाख रुपये से अधिक का माल बेचा। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर बहजोई और संभल की प्रदर्शनियों में भी उनके हैंडलूम उत्पादों की खूब बिक्री हुई।
180 समूहों के बीच बनाई विशिष्ट पहचान
क्षेत्र के करीब 180 समूहों के बीच नजराना का समूह हैंडलूम, दरी और तौलिया निर्माण के क्षेत्र में कार्य करने वाला प्रमुख समूह बनकर उभरा है। एक तौलिये की लागत करीब 40 रुपये आती है, जिसे बड़े मेलों और प्रदर्शनियों में 70 से 80 रुपये तक में बेचा जाता है। नजराना बताती हैं कि समूह से जुड़ी 10 महिलाओं को घर बैठे नियमित काम मिल रहा है, जिससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण सम्मानजनक तरीके से कर पा रही हैं। आने वाले समय में वे समूह के कार्यक्षेत्र को और अधिक विस्तारित करने की योजना पर काम कर रही हैं।

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