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मंडल व्यूरो चीफ राजेश्वर सिंह
संभल से खास खबर
संभल की गायत्री देवी बनीं स्वावलंबन की मिसाल, किराना-कॉस्मेटिक से लेकर सरकंडा मूढ़ा निर्माण तक फैलाया दायरा
डे-एनआरएलएम से जुड़कर हर माह कमा रहीं ₹30 हजार, कई जिलों की प्रदर्शनियों में लगा चुकी हैं स्टॉल
संभल, 20 सितंबर। इरादे मजबूत हों तो सीमित संसाधन भी तरक्की की राह नहीं रोक सकते। इसे सच कर दिखाया है संभल जिले के गुन्नौर तहसील क्षेत्र अंतर्गत ईशमपुर डांडा गांव की 28 वर्षीय गायत्री देवी ने। हाईस्कूल तक पढ़ी गायत्री ने दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डे-एनआरएलएम) से जुड़कर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बदला, बल्कि गांव की करीब 50 अन्य महिलाओं को भी अपने साथ काम देकर आत्मनिर्भर बनाया। महज 15 हजार रुपये के रिवाल्विंग फंड (आरएफ) से शुरुआत करने वाली गायत्री अब तक सीसीएल और सीआईएफ फंड के जरिए कुल 3.65 लाख रुपये का वित्तीय सहयोग लेकर कॉस्मेटिक, किराना दुकान और सरकंडे के मूढ़े बनाने का काम सफलतापूर्वक चला रही हैं। आज वे विभिन्न माध्यमों से हर महीने लगभग 30 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।
शादी के बाद समूह से नाता, 2019 से संभाली कमान
वर्ष 2009 में विवाह के बाद गायत्री देवी 2012 में पहली बार स्वयं सहायता समूह से जुड़ी थीं। हालांकि, उस समय वे अधिक सक्रिय नहीं थीं। वर्ष 2019 में उन्होंने नारायण हरी स्वयं सहायता समूह से जुड़कर समूह सखी के रूप में पूरी सक्रियता से काम शुरू किया। सबसे पहले उन्हें व्यवसाय शुरू करने के लिए 15 हजार रुपये का आरएफ फंड मिला, जिससे उन्होंने छोटे स्तर पर काम बढ़ाया। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2021 में एक लाख रुपये की पहली सीसीएल कराई, जिसे समय से चुकाकर वर्ष 2022 में 2.50 लाख रुपये की दूसरी सीसीएल स्वीकृत कराई।
किराना, कॉस्मेटिक और सरकंडा हस्तशिल्प से बदली तस्वीर
ऋण की मदद से गायत्री ने अपने गांव में खुद की कॉस्मेटिक और परचून (किराना) की दुकान खोली, जिससे परिवार का दैनिक खर्च सुचारू रूप से चलने लगा। इसके बाद उन्होंने गांव के दो-तीन समूहों को एक साथ जोड़कर सीआईएफ के सहयोग से सरकंडे के पारंपरिक मूढ़े बनाने का काम बड़े स्तर पर शुरू किया। आज उनके साथ लगभग 50 महिलाएं इस कार्य में लगी हुई हैं। मूढ़ा निर्माण और बिक्री से ही समूह को हर महीने 15 से 20 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है, जबकि दुकानों की आय मिलाकर गायत्री प्रतिमाह 30 हजार रुपये तक कमा लेती हैं।
बहजोई और चंदौसी के सरस मेलों में लगाई प्रदर्शनी
प्रशासन की ओर से आयोजित विभिन्न प्रदर्शनियों और मेलों में भी गायत्री देवी अपने बनाए उत्पादों के स्टॉल लगा चुकी हैं। वे संभल के बहजोई, चंदौसी और गुन्नौर में आयोजित सरकारी प्रदर्शनियों में अपने समूह के मूढ़े और हस्तशिल्प उत्पादों को लेकर पहुंचीं। गायत्री का कहना है कि घर की चारदीवारी से निकलकर जब बाहर कदम रखा, तो दुनिया देखने और समझने का मौका मिला। आत्मविश्वास बढ़ा और योजनाओं की जमीनी जानकारी हासिल हुई।
गांव के पास यूनिट स्थापित कर और महिलाओं को जोड़ना लक्ष्य
गायत्री देवी अपने इस उद्यम को और बड़े मुकाम पर ले जाना चाहती हैं। उनका कहना है कि वे प्रशासनिक अधिकारियों की बैठकों में भी यह मांग उठाती रही हैं कि गांव के नजदीक कोई बड़ी उत्पादन यूनिट या कंपनी जैसी व्यवस्था शुरू हो, ताकि क्षेत्र की सैकड़ों अन्य महिलाओं को भी नियमित रोजगार मिल सके। वे आगे भी नए प्रोजेक्ट के तहत बैंक ऋण लेकर अपने कारोबार का और विस्तार करने की तैयारी में हैं।
"ग्रामीण आजीविका मिशन (डे-एनआरएलएम) से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। गायत्री देवी ने सीमित संसाधनों के बावजूद स्वयं सहायता समूह के जरिए किराना, कॉस्मेटिक और सरकंडा हस्तशिल्प में जो मुकाम हासिल किया है, वह प्रेरणादायी है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि ऐसे हुनरमंद समूहों को बैंक लिंकेज, बाजार और मेलों-प्रदर्शनियों के माध्यम से अधिक से अधिक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए जाएं, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।"
— अंकित खंडेलवाल, जिलाधिकारी, संभल
