प्रेस नोट
‘जन के लिए तंत्र निर्माण’ को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाकर 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ेगा जागरूक समाज दल : क्रांतिकारी गौरव सिंह
उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड और पंजाब की सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी; समान विचारधारा वाले दलों के साथ ‘शोषित इंकलाब मोर्चा’ के माध्यम से चुनावी मैदान में उतरने की घोषणा
लखनऊ। जागरूक समाज दल के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष क्रांतिकारी गौरव सिंह ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की राजनीतिक दिशा स्पष्ट करते हुए कहा है कि उनकी पार्टी का मुख्य चुनावी मुद्दा केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि “जन के लिए तंत्र निर्माण” होगा।
गौरव सिंह के अनुसार उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड और पंजाब की सभी विधानसभा सीटों पर पार्टी अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव में समाज के उन वर्गों के मूलभूत प्रश्नों को प्रमुखता दी जाएगी जिन्हें पार्टी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से लंबे समय से वंचित मानती है।
गौरव सिंह ने लोकतंत्र की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत में चुनाव और लोकतांत्रिक संस्थाएं तो स्थापित हुईं, लेकिन उनके अनुसार लोकतंत्र को अभी तक आम नागरिक के जीवन की वास्तविक व्यवस्था में पूरी तरह परिवर्तित नहीं किया जा सका है।
उन्होंने अब्राहम लिंकन की लोकतंत्र संबंधी प्रसिद्ध अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक शासन का मूल आधार जनता, जनता की भागीदारी और जनता के हित में चलने वाली शासन व्यवस्था है। उनके अनुसार भारत में भी लोकतंत्र का मूल्यांकन केवल चुनाव कराने से नहीं, बल्कि इस बात से होना चाहिए कि आम नागरिक को सामाजिक सम्मान, समान अवसर, आर्थिक सुरक्षा और निर्णय-प्रक्रिया में कितनी वास्तविक भागीदारी मिल रही है।
भाजपा सरकारों की नीतियों पर राजनीतिक असहमति
भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार तथा भाजपा शासित राज्यों की नीतियों पर राजनीतिक असहमति व्यक्त करते हुए गौरव सिंह ने कहा कि उनकी दृष्टि में वर्तमान शासन व्यवस्था आर्थिक और राजनीतिक शक्ति के पर्याप्त विकेंद्रीकरण तथा व्यापक जनभागीदारी की दिशा में अपेक्षित परिवर्तन नहीं ला सकी है।
उन्होंने कहा कि यह उनकी पार्टी का राजनीतिक मूल्यांकन है और 2027 के चुनाव में जनता के सामने इसी मूल्यांकन को रखा जाएगा।
गौरव सिंह ने कहा कि किसी भी सरकार का मूल्यांकन केवल उसके द्वारा घोषित योजनाओं से नहीं बल्कि उनके जमीनी परिणामों से होना चाहिए। उनके अनुसार रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों की आर्थिक स्थिति, श्रमिकों की आय, महिलाओं की सुरक्षा तथा सामाजिक रूप से वंचित वर्गों की भागीदारी जैसे प्रश्न आज भी भारतीय लोकतंत्र के सामने गंभीर चुनौतियों के रूप में मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी जाति, धर्म या समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि उन सामाजिक और आर्थिक संरचनाओं पर सवाल उठाना है जिनके कारण उनके अनुसार सत्ता, संसाधन और अवसर सीमित समूहों में केंद्रित होते रहे हैं।
“10 प्रतिशत लुटेरा वर्ग” पर गौरव सिंह की टिप्पणी
भारतीय सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था की अपनी वैचारिक व्याख्या करते हुए गौरव सिंह ने “10 प्रतिशत लुटेरा वर्ग” की अवधारणा का उल्लेख किया। उनके अनुसार देश की आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था में एक सीमित प्रभावशाली वर्ग लंबे समय से संसाधनों और निर्णय-प्रक्रिया पर disproportionate प्रभाव रखता आया है।
उन्होंने इस स्थिति को अपनी राजनीतिक भाषा में “लुटेरों के द्वारा, लुटेरों के लिए और लुटेरों का राज” जैसी व्यवस्था के रूप में वर्णित किया।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी यह टिप्पणी किसी जाति अथवा धार्मिक समुदाय के प्रत्येक व्यक्ति के विरुद्ध नहीं है। उनके अनुसार उनका निशाना सत्ता का केंद्रीकरण, सामाजिक वर्चस्व और आर्थिक असमानता की वह संरचना है जिसके कारण बड़ी संख्या में नागरिकों को समान अवसर और प्रभावी भागीदारी नहीं मिल पाती।
गौरव सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी इस व्यवस्था के स्थान पर ऐसी लोकतांत्रिक व्यवस्था की वकालत करती है जिसमें शासन और विकास का केंद्र आम नागरिक हो।
खाद्य सुरक्षा से आगे सम्मानजनक जीवन का सवाल
देश में खाद्य सुरक्षा की स्थिति का उल्लेख करते हुए गौरव सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार के अनुसार लगभग 80 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के अंतर्गत पात्र Priority Households को 5 किलो खाद्यान्न प्रति व्यक्ति प्रति माह उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
उनका कहना था कि गरीब नागरिकों को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराना आवश्यक है, लेकिन राजनीतिक बहस यहीं समाप्त नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार लक्ष्य ऐसी व्यवस्था का होना चाहिए जिसमें नागरिकों को केवल न्यूनतम खाद्य सुरक्षा पर निर्भर रहने के बजाय स्थायी रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन के अवसर प्राप्त हों।
युवाओं के रोजगार को बताया महत्वपूर्ण प्रश्न
युवा आबादी के भविष्य को लेकर गौरव सिंह ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है, लेकिन यदि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल और रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलते तो यही जनसांख्यिकीय शक्ति चुनौती में बदल सकती है।
उन्होंने PLFS 2023-24 के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि 15 से 29 वर्ष के युवाओं में बेरोजगारी दर 10 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
उनके अनुसार 2027 के चुनाव में युवाओं से जुड़े प्रश्न को केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित रखने के बजाय रोजगार, स्वरोजगार, कौशल, उद्यमिता और सम्मानजनक कार्य के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
किसान और कृषि मजदूरों की स्थिति पर चिंता
किसानों और कृषि मजदूरों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए गौरव सिंह ने NCRB के 2023 के आंकड़ों का उल्लेख किया। उनके अनुसार उस वर्ष कृषि क्षेत्र से जुड़े 10,786 लोगों की आत्महत्या दर्ज हुई, जिनमें 4,690 किसान और 6,096 कृषि मजदूर शामिल थे।
उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों को केवल आंकड़ों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार कृषि क्षेत्र की आर्थिक असुरक्षा, लागत, बाजार, आय, ऋण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रश्नों का स्थायी समाधान आवश्यक है।
उन्होंने किसानों के लिए न्यायसंगत मूल्य, कृषि लागत में राहत, सिंचाई, भंडारण, बाजार और कृषि मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा को महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बताया।
महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान भी चुनावी मुद्दा
महिलाओं के उत्पीड़न और दैहिक तथा लैंगिक हिंसा को भी गौरव सिंह ने गंभीर सामाजिक एवं लोकतांत्रिक प्रश्न बताया।
उन्होंने NCRB के 2023 के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4,48,211 मामले दर्ज किए गए थे।
उनके अनुसार महिलाओं की सुरक्षा को केवल कानून-व्यवस्था का विषय मानना पर्याप्त नहीं है। शिक्षा, रोजगार, आर्थिक स्वतंत्रता, सामाजिक सम्मान, न्याय तक पहुंच और सार्वजनिक जीवन में बराबरी की भागीदारी को भी महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा के व्यापक प्रश्न के साथ देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की वास्तविक परीक्षा इस बात से होती है कि उसमें महिलाओं और कमजोर वर्गों को कितनी सुरक्षित और सम्मानजनक सामाजिक स्थिति प्राप्त है।
सामाजिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व पर जोर
गौरव सिंह ने कहा कि जागरूक समाज दल सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित वर्गों को उनकी जनसंख्या, आवश्यकता और सामाजिक स्थिति के अनुरूप न्यायपूर्ण भागीदारी दिलाने के प्रश्न को अपने राजनीतिक एजेंडे में प्रमुख स्थान देगा।
उन्होंने कहा कि पार्टी की दृष्टि में भागीदारी का प्रश्न केवल चुनाव में वोट देने तक सीमित नहीं होना चाहिए। शिक्षा, रोजगार, प्रशासन, राजनीति, आर्थिक अवसर और निर्णय-प्रक्रिया में भी व्यापक सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।
उन्होंने इसे “जनतंत्र को मतदान से आगे ले जाकर जनभागीदारी का लोकतंत्र बनाने” की दिशा में आवश्यक कदम बताया।
‘शोषित इंकलाब मोर्चा’ के माध्यम से चुनावी तैयारी
2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गठजोड़ की जानकारी देते हुए गौरव सिंह ने कहा कि समान लक्ष्य और विचारधारा वाले राजनीतिक दलों के साथ मिलकर “शोषित इंकलाब मोर्चा” के माध्यम से चुनावी अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है।
उन्होंने बताया कि इस राजनीतिक पहल में शोषित समाज दल, भारतीय नवक्रांति पार्टी, जागृति शोषित समाज दल और महान समता पार्टी सहित समान विचारधारा वाले दलों को साथ लाने का प्रयास किया जा रहा है।
उनके अनुसार उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड और पंजाब की सभी विधानसभा सीटों तक इस राजनीतिक अभियान को ले जाने का लक्ष्य है।
गौरव सिंह ने कहा कि प्रस्तावित मोर्चे का चुनावी एजेंडा किसी एक जाति अथवा समुदाय तक सीमित नहीं होगा। इसमें किसान, मजदूर, युवा, महिलाएं, सामाजिक रूप से वंचित वर्ग, छोटे कारोबारी, कारीगर और आम नागरिकों से जुड़े मूलभूत प्रश्नों को प्राथमिकता दी जाएगी।
“सरकार कौन बनाएगा से अधिक महत्वपूर्ण है कि तंत्र किसके लिए बनेगा”
अपने राजनीतिक दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए गौरव सिंह ने कहा कि 2027 का चुनाव उनके लिए केवल यह तय करने का चुनाव नहीं होगा कि अगली सरकार किस दल की बनेगी।
उन्होंने कहा—
“हमारा मूल सवाल यह है कि सरकार और शासन-तंत्र किसके लिए बनाया जाएगा, निर्णय लेने की शक्ति किसके पास होगी और विकास के अवसरों में आम नागरिक की वास्तविक भागीदारी कितनी होगी।”
उन्होंने कहा कि जागरूक समाज दल का अंतिम लक्ष्य “जन के लिए जनहितकारी तंत्र का निर्माण” है।
गौरव सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में इसी विचार को जनता के बीच लेकर जाएगी और यह सवाल उठाएगी कि भारत में लोकतंत्र को केवल चुनावी व्यवस्था से आगे बढ़ाकर सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक जीवन में भी किस प्रकार अधिक जन-केंद्रित बनाया जा सकता है।
उनके अनुसार इसी दृष्टिकोण का संक्षिप्त राजनीतिक सूत्र है—
“कमेरों के द्वारा, कमेरों के लिए और कमेरों की भागीदारी वाला जनतंत्र।”
— प्रेस नोट समाप्त —
प्रेषित प्रतिलिपि : सूचनार्थ एवं प्रकाशनार्थ
जागरूक समाज दल (JASD)
क्रांतिकारी गौरव सिंह
संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष
