जेल की सलाखों के पीछे गूंजा शिक्षा का संदेश, बंदियों को मिली नई राह
शिक्षक दिवस पर जिला कारागार में साक्षर बंदियों को प्रमाण-पत्र, निरक्षर बंदियों को शैक्षिक किट वितरित
हम भारती न्यूज़ से उत्तर प्रदेश चीफ व्यूरो प्रमुख धर्मेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की ख़ास ख़बर
गोरखपुर शिक्षक दिवस के अवसर पर जिला कारागार गोरखपुर में शिक्षा और सुधार को समर्पित प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बंदियों को शिक्षा के महत्व से रूबरू कराते हुए उन्हें अपराध की राह छोड़कर समाज और राष्ट्र के विकास में सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कारागार अधीक्षक दिलीप कुमार पाण्डेय ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद बंदी पप्पू राय व उनके साथियों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। बंदियों ने देशभक्ति गीतों के माध्यम से माहौल को भावनात्मक बना दिया।
बंदी सुधार एवं पुनर्वास अभियान के तहत शिव नाडर फाउंडेशन के सातवें बैच में साक्षर हुए बंदियों को अतिथियों के हाथों साक्षरता प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। वहीं आगामी आठवें बैच में शामिल होने वाले निरक्षर बंदियों को शैक्षणिक किट वितरित की गई।
कार्यक्रम में करियर काउंसलर अमित आनंद ने बंदियों को रिहाई के बाद शिक्षा और कौशल के जरिए बेहतर भविष्य बनाने के लिए मार्गदर्शन दिया। वक्ताओं ने कहा कि अपराध का रास्ता व्यक्ति के जीवन के साथ-साथ परिवार और समाज पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। शिक्षा व्यक्ति को सही-गलत का विवेक देती है और जीवन की दिशा बदलने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है।
वक्ताओं ने बंदियों से अपील की कि वे जेल से बाहर निकलने के बाद एक जिम्मेदार और नेक इंसान बनकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ें और देश के विकास में अपना योगदान दें।
कार्यक्रम में शिक्षाविदों एवं विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी बंदियों को जीवन में शिक्षा, नैतिकता और सकारात्मक सोच अपनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम का संचालन जेल विजिटर श्रीमती अमृताधीर मेहरोत्रा तथा व्यवस्थाओं की देखरेख कारागार अध्यापक राजीव चौरसिया ने की।

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