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₹1500 की प्राइवेट नौकरी से ₹55 हजार मासिक आमदनी तक: संजीवन समूह की अनुपम ने एनआरएलएम से बदली तकदीर*

 हम भारती न्यूज़ मंडल व्यूरो चीफ राजेश्वर सिंह संभल से खास खबर



 



₹1500 की प्राइवेट नौकरी से ₹55 हजार मासिक आमदनी तक: संजीवन समूह की अनुपम ने एनआरएलएम से बदली तकदीर*


–प्रशासनिक संबल और आरसेटी के 20 दिन के प्रशिक्षण ने संवारी राह, चंदौसी के 12 कॉलेजों से लेकर कलेक्ट्रेट तक पहुंची रामदाना लड्डू की मिठास


–रक्षाबंधन पर कलेक्ट्रेट सभागार में सजाया तिरंगा व मोती राखियों का स्टॉल, 2025 में 3.05 लाख तो 2026 में अब तक 1.86 लाख रुपये की कर चुकी हैं शुद्ध कमाई


संभल, 26 अगस्त। जनपद के बनियाखेड़ा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम जैरोई हयात नगर की 35 वर्षीय अनुपम ने आर्थिक तंगी और संघर्षों को मात देकर ग्रामीण महिला सशक्तीकरण की नई इबारत लिखी है। कभी निजी स्कूल में महज 1500 रुपये के अल्प मानदेय पर पढ़ाने वाली और लॉकडाउन में रोजगार छिन जाने के बाद मुफलिसी झेलने वाली बीए पास अनुपम आज राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के सहारे हर महीने 50 से 55 हजार रुपये का सफल कारोबार चला रही हैं। चंदौसी के 12 इंटर कॉलेजों में 2.80 लाख रुपये के लड्डू आपूर्ति करने से लेकर प्रशासनिक बैठकों, योग दिवस और अब रक्षाबंधन पर कलेक्ट्रेट सभागार में स्टॉल लगाने तक अनुपम का सफर अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वावलंबन की बड़ी प्रेरणा बन गया है।


लॉकडाउन की तंगी से संजीवन समूह तक का संघर्षपूर्ण सफर

ग्राम जैरोई हयात नगर की रहने वाली 35 वर्षीय अनुपम एक बच्चे की मां हैं और उन्होंने बीए तक की शिक्षा प्राप्त की है। वर्ष 2020 से पूर्व वह और उनके पति गांव के ही एक निजी विद्यालय में बच्चों को पढ़ाते थे, जहां उन्हें प्रतिमाह केवल 1500 रुपये मिलते थे। वर्ष 2020 के लॉकडाउन में स्कूल बंद होने के साथ ही उनकी यह मामूली नौकरी भी छूट गई, जिससे परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया। इसी विषम परिस्थिति में उन्होंने हौसला नहीं खोया और वर्ष 2020 में एनआरएलएम के तहत गठित संजीवन स्वयं सहायता समूह की सदस्यता ली। वर्ष 2021 में समूह के माध्यम से 70 हजार रुपये का ऋण लेकर उन्होंने गांव में ब्यूटी पार्लर व जनरल स्टोर की शुरुआत की। अपनी लगन और मेहनत के दम पर उन्होंने 10 माह की अवधि के बजाय महज 8 महीने में पूरा कर्ज चुकता कर दिया और 20 हजार रुपये की शुद्ध बचत भी की।


आरसेटी की 20 दिन की ट्रेनिंग और 4 लाख के लड्डू कारोबार की शुरुआत

अपने कार्य को विस्तार देने के लिए अनुपम ने ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) से 20 दिन का व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिससे उनकी उत्पाद गुणवत्ता और पैकेजिंग में बड़ा निखार आया। इसके बाद वर्ष 2024 में समूह के सीआईएफ फंड से 50 हजार रुपये का ऋण लेकर उन्होंने रामदाना, रागी, ज्वार व बाजरा से मल्टीग्रेन पौष्टिक लड्डू और घर पर भुने देसी चने की नमकीन बनाने का उद्यम शुरू किया। प्रशासनिक अधिकारियों (डीएम, सीडीओ व एसपी) द्वारा उत्पादों की गुणवत्ता परखने के बाद उन्हें बड़ा बाजार उपलब्ध कराया गया। नवंबर 2024 से चंदौसी शहर के 12 प्रमुख इंटर कॉलेजों में बच्चों के लिए 2.80 लाख रुपये के लड्डुओं की आपूर्ति की गई। इसके अलावा कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित होने वाली विभिन्न प्रशासनिक बैठकों और सम्मेलनों में भी उनके समूह के लड्डुओं व नमकीन की नियमित मांग होने लगी।


मंडल भर में फैला दायरा, 20 फीसदी तक मुनाफा और अन्य महिलाओं को संबल

अनुपम का तैयार उत्पाद केवल संभल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मुरादाबाद और अमरोहा जैसे पड़ोसी जनपदों तक पहुंचा। 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अमरोहा में उनके समूह के 22,600 रुपये के उत्पादों की बिक्री हुई। पूरे एक वर्ष (2025) में केवल संभल जिले में उन्होंने 3.86 लाख रुपये से अधिक के उत्पादों की बिक्री दर्ज की। प्रशासनिक और विशेष आयोजनों के ऑर्डरों पर उन्हें लगभग 20 प्रतिशत का सीधा शुद्ध मुनाफा प्राप्त होता है। वर्ष 2025 में उन्होंने लड्डू व अन्य गतिविधियों से लगात हटाने के बाद शुद्ध रूप से करीब 3.05 लाख रुपये कमाए, जबकि वर्ष 2026 में अब तक वह 1.86 लाख रुपये की आमदनी हासिल कर चुकी हैं। संजीवन समूह में कुल 10 महिलाएं शामिल हैं। जब भी बड़े ऑर्डर आते हैं, अनुपम समूह की अन्य महिलाओं को कार्य पर लगाकर उन्हें उचित पारिश्रमिक देती हैं, जिससे गांव की अन्य महिलाएं भी आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं।


कलेक्ट्रेट सभागार में रक्षाबंधन स्टॉल और सेनेटरी पैड इकाई का विजन

आगामी 28 तारीख को रक्षाबंधन पर्व के उपलक्ष्य में जिला प्रशासन द्वारा अनुपम को कलेक्ट्रेट सभागार में विशेष स्टॉल लगाने का अवसर प्रदान किया गया है। इस स्टॉल पर उनके द्वारा हाथ से तैयार की गई खूबसूरत मोतियों की राखियां, तिरंगा राखियां, रामदाना-मल्टीग्रेन लड्डू और देसी नमकीन उपलब्ध कराई जा रही हैं। अनुपम समूह सखी के रूप में अन्य महिलाओं को आजीविका और स्वास्थ्य सखी जैसे पदों से जोड़कर आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरित कर रही हैं। अपनी इस सफलता से उत्साहित होकर अनुपम अब ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए अपने घर पर सेनेटरी पैड निर्माण की ऑटोमैटिक मशीन लगाने की कार्ययोजना पर काम कर रही हैं, जिसके लिए उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर सहयोग की रूपरेखा भी तैयार की है।


'हुनर और हौसले से खुलती हैं आत्मनिर्भरता की राहें'

एक वक्त था जब लॉकडाउन में 1500 रुपये की नौकरी छूटने के बाद परिवार का खर्च चलाना भी भारी पड़ रहा था। लेकिन आज जब खुद 50 से 55 हजार रुपये महीना कमाकर परिवार को संबल दे रही हूं और समूह की अन्य बहनों को भी आमदनी का जरिया बना रही हूं, तो एक नया आत्मविश्वास मिलता है। ग्रामीण महिलाओं को चूल्हे-चौके से आगे निकलकर अपने हुनर को पहचानना होगा। सरकार की योजनाएं हमारे साथ हैं, बस पहला कदम बढ़ाने और मेहनत करने की हिम्मत चाहिए।"

— अनुपम, संचालक, संजीवन स्वयं सहायता समूह (जैरोई हयात नगर, संभल)

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