गोरखपुर एम्स के दवाखाने पर नहीं मिलती दवाएं:बाहर से मरीजों को लेनी पड़ती है दवाएं,गेट के बाहर सेल्समैनों का लगता है जमावड़ा
हम भारती न्यूज से गोरखपुर जिला ब्यूरो प्रमुख धर्मेन्द्र कुमार श्रीवास्तव
गोरखपुर एम्स प्रदेश का दूसरा एम्स है। लेकिन हालत यह है कि यहां पर दिखाने आने वाले मरीजों को एम्स के दवाखाने से दवाएं नहीं मिलती हैं। मिलती भी हैं तो इक्का दुक्का दवाएं ही। पर्चे पर लिखी गई अधिकांश दवाएं लोगों को बाहर से ही लेने पड़ती हैं। वहीं गेट के बाहर ही प्राइवेट दुकानदारों के सेल्समैनों का जमावड़ा लगा रहता है। वे तमाम आफर का दावा कर मरीजों को अपनी दुकानों पर ले जाते हैं।
एम्स में है अमृत दवाखाना
हालांकि एम्स में दवाओं के वितरण के लिए अमृत दवाखाना खोला गया है। जहां 60 प्रतिशत सस्ती दवाएं मिलती हैं। लेकिन हालत यह है कि ओपीडी के डॉक्टर पर्ची पर जो दवाएं लिखते हैं या तो वह इस दवाखाने पर होती ही नहीं है या फिर इक्का दुक्का दवाएं ही मिलती हैं। जिससे लोगों को बाहर से ही दवाएं लेनी पड़ती हैं।
रोजाना ओपीडी में आते हैं 500 से ज्यादा मरीज
आपको बता दें कि 22 जुलाई 2016 को एम्स की नींव रखी गई थी। 24 फरवरी 2019 को एम्स ओपीडी की उदघाटन हुआ था। 7 दिसम्बर 2021 को पीएम मोदी ने लोकापर्ण किया था। यहां की ओपीडी में रोजाना करीब 2500 मरीज आते हैं। जिनमें से 1500 करीब 2000 मरीजों को रोजाना देखा जाता है। डॉक्टर दवाएं भी लिखते हैं लेकिन लोगों को एम्स के अमृत दवाखाने से निराश होकर जाना पड़ता है।
बिहार से भी आते हैं मरीज
एम्स में गोरखपुर, महराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, आजमगढ़, बिहार के गोपालगंज, सिवान, नरकटियागंज,पश्चिमी चंपारण आदि जगहों से मरीज आते हैं। यहां पर 16 ओटी भी चल रही हैं। वहीं यहां नाक, कान व गला रोग, मानसिक रोग विभाग,दंत रोग विभाग, बाल रोग विभाग,सीना रोग बिभाग,सर्जरी विभाग,चर्म रोग विभाग, स्त्री एवं प्रसूति रोग,शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग,नेत्र रोग विभाग,रेडियोथेरेपी (कैसर) रोग विभाग,मेडिसिन विभाग,फेमिली मेडिसिन विभाग,हड्डी रोग विभाग, ब्रेस्ट रोग विभाग, होम्योपैथी विभाग है।

