रावण के अन्याय का जटायु ने किया प्रतिकार
हम भारती न्यूज से गोरखपुर मण्डल ब्यूरो प्रमुख धर्मेन्द्र कुमार श्रीवास्तव
माता जानकी के अपहरण को- देवता,दानव,मानव, गंधर्व,नाग, किन्नर यहां तक कि कोई भी शरीरधारी रावण का भयवश विरोध नहीं किया । माता की आर्तनाद को सुनकर जटायु ने उसका डटकर मुकाबला किया और लड़ते हुए बुरी तरह घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा।
उक्त- बातें अयोध्या धाम से पधारे आचार्य कृपा शंकर जी महाराज ने कही। वह पाली विकास खंड के ग्राम सजनापार में श्रीराम मानस महायज्ञ के सातवें दिन व्यास पीठ से श्रद्धालुओं को कथा रसपान करा रहे थे। उन्होंने कहा कि- समाज में अन्याय का प्रतिकार होना ही चाहिए।भले ही लोगों का ढंग अलग-अलग क्यों न हो। व्यक्ति के परोपकार पूर्ण कर्म ही भगवान की आसली पूजा है । राम ने जब पीड़ा से कराहते असहाय अवस्था में पक्षीराज जटायु को देख, तो उनका हृदय करूणा से भर गया । कहा है कि हे महात्मन आप की ऐसी गति किसने की है । उस पापी को संसार में जीने का हक़ नहीं है । जटायु ने सभी राम को बताई और कहा कि आप जानकी को आतताई रावण से छुड़ा लिजिए।
कथा व्यास ने कहा कि- राम की आंखें नम हो गई। जटायु को गले से लगा कर कहा कि आप ने अपने कर्म से सब कुछ पा लिया है। आप को अमर कर देता हूं। गिद्ध राज़ के आग्रह पर उसे मोक्ष धाम प्रदान किया। पुत्र की भांति उनका सत्कर्म किया।इसे देख कर देवता फूल बरसाने लगे । उक्त अवसर पर मुख्य यजमान पूर्व प्रधान वीरेंद्र यादव, सुदामा चौधरी, बिट्ट,भागी रथी, शकुंतला देवी,चैन चौधरी,अमन राज,श्याम बरन सिंह,मुकेश, शिवम् सिंह, नितेश शुक्ला, ध्रुव नारायण शुक्ला, रवि राज,रतन लाल समेत कई लोग मौजूद थे।
