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संवाददाता मोहम्मद अशरफ जिला ब्यूरो चीफ सारण बिहार
उर्दू अदब की एवं मीठी जुबान है, जो भाषाओं की खूबसूरती को बढ़ता है- जिलाधिकारी
सारण, छपरा 28 फरवरी: जिला उर्दू भाषा कोषांग, सारण के द्वारा आज डी.आर.डी.ए. सभागार में फरोग-ए-उर्दू-सेमिनार मुशायरा एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। समारोह का उद्घाटन जिलाधिकारी श्री राजेश मीणा के द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त श्री अमित कुमार, अपर समाहर्त्ता डॉ गगन, निदेशक, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, श्री बलदेव चौधरी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी-सह-प्रभारी पदाधिकारी उर्दू भाषा कोषाग, सारण, श्री रजनीश कुमार राय, जिला जन-सम्पर्क पदाधिकारी श्री कन्हैया कुमार एवं जिला अल्पसंख्यक विभाग के कर्मीगण उपस्थित थे। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों का स्वागत भाषण करते हुए सारण के जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी-सह-प्रभारी पदाधिकारी उर्दू भाषा कोषाग, सारण, श्री रजनीश कुमार राय ने कहा कि उर्दू बोलचाल की आम जुबान की भाषा है, सरकार द्वारा भी उर्दू के विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने उर्दू भाषा की विकास पर बल देने की आवश्यकता जतायी।
जिलाधिकारी के द्वारा फरोग-ए-उर्दू- सेमिनार सह मुशायरा एवं कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि उर्दू अदब की जुबान है, उर्दू मीठी जुबान है, उर्दू की झलक सभी भाषाओं में देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि उर्दू भाषा देश की खूबसूरती है, हमारे देश में अनेकों भाषाएं संस्कृति हैं जिसमें उर्दू का बड़ा योगदान है। उन्होंने अपने संबोधन में यह भी कहा कि उर्दू भाषा का समावेश सभी भाषाओं में मिलती है। उर्दू भाषा हमें गंगा जमुनी तहजीब को दर्शाता है। जिलाधिकारी के द्वारा कहा गया कि उर्दू भाषा के विकास के लिए प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है। हम सबको इसके विकास हेतु कार्य करना होगा। बिहार सरकार के उर्दू निदेशालय द्वारा हर साल इस तरह का कार्यक्रम आयोजन होता है जिससे उर्दू के विकास में बड़ी मदद मिलती है। इस तरह के आयोजन से उर्दू भाषा को बढ़ावा मिलता है। जिलाधिकारी ने एक दूसरे की भाषा को सम्मान करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे हमारी संस्कृति को विकास करने में मदद करती है।
फरोग-ए-उर्दू-सेमिनार सह मुशायरा एवं कार्यशाला को संबोधित करते हुए उप विकास सारण, श्री अमित कुमार ने कहा कि उर्दू को राज्य का द्वितीय भाषा के रूप में दर्जा प्राप्त है। इस तरह के आयोजन से उर्दू के विकास को निश्चय ही बढ़ावा मिलता है। भारतीय संस्कृति की यही परंपरा है कि हर भाषा के लोग एक साथ रहते हैं। जो समाज में घनिष्ठता बढ़ाता है। मुशायरा को संबोधित करते हुए अपर समाहर्त्ता डॉ गगन के द्वारा कहा गया कि हमारे देश में अनेकता में एकता की परंपरा सदियों से चली आ रही है इसी परंपरा का आगे बढ़ाने के लिए हम सब को लगातार प्रयास करते रहना चाहिए। उन्होंने अपने संबोधन में यह भी कहा कि उर्दू विकसित भाषा है। जिसका समावेश सभी भाषाओं में देखने को मिलता है।
इस अवसर पर मुशायरा का भी आयोजन किया गया था जिसमें दर्जनों से अधिक शायरों ने अपने-अपने शायरी के माध्यम से उपस्थित लोगों के बीच अपना संदेश दिया। मंच संचालन नदीम अहमद ने अपने शायराना अंदाज में किया।
