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भाजपा नेता ने लेखपाल पर लगाया रिश्वत लेने का आरोप

 भाजपा नेता ने लेखपाल पर लगाया रिश्वत लेने का आरोप



सहजनवां तहसील में कार्यरत लेखपाल की सीएम से किया शिकायत


हम भारती न्यूज़ से गोरखपुर मण्डल ब्यूरो प्रमुख धर्मेन्द्र कुमार श्रीवास्तव


गोरखपुर  जब सत्ताधारी दल के नेता पर ही रिश्वत देने का दबाव हो तो सोचिए एक आम आदमी की क्या मजाल जो किसी काम के लिए रिश्वत देने से इनकार कर सके। ज़ीरो टॉलरेंस वाली सरकार होने का दावा करने वाली सरकार के मुखिया के गृह जनपद में कुछ ऐसा ही चल रहा है। पिछले दिनों जहां सदर तहसील में अमीन समेत लेखपालों की दबंगई और मनमानी पोस्टिंग का मामला सामने आया था वहीं इस बार सहजनवां तहसील में तैनात एक लेखपाल का कारनामा सामने आया है। यहां तैनात लेखपाल जितेंद्र मिश्रा ने भाजपा नेता को भी नही बक्शा और सिस्टर के सिस्टाचार में उनको भी शामिल कर लिया। 

खुद को भाजपा का बूथ अध्यक्ष बताने वाले मेवालाल पुत्र लक्ष्मण निवासी बोक्टा वार्ड नo 2 ने अपने जमीन का उपजिलाधिकारी सहजनवा के कोर्ट में बटवारा दाखिल किया था जिसमे आदेश भी हो गया है और आदेश में हल्का लेखपाल का रिपोर्ट लगता है जिसके लिए पीड़ित ने हल्का लेखपाल से बात किया तो हल्का लेखपाल जितेंद्र मिश्रा ने पीड़ित से ₹5000 रुपए की मांग किया। इसके बाद पीड़ित ने लेखपाल साहब को ₹3000 दे दिया और बाकी का ₹2000 काम होने के बाद देने की बात कही। लेकिन हल्का लेखपाल ने जब पीड़ित की जमीन बटवारे पर अपनी रिपोर्ट नही लगाया और बकाया रूपये की मांग करने लगा तब पीड़ित ने हताश होकर अपनी ही सरकार के लेखपाल के खिलाफ मुखमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवा दिया।

आपको बताते चलें कि लेखपाल जितेंद्र मिश्रा सितम्बर 2016 से सहजनवां में तैनात हैं । स्थानीय प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन में इनकी मज़बूत पकड़ का नतीजा है कि ये लंबे समय से एक ही तहसील में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। तहसील में चर्चा है कि लेखपाल साहब जो भी सेवाएं जनता को देते हैं उसका बकायदा  रेट निर्धारित है। अब चाहे वो साधारण जनता हो या फिर सत्ताधारी दल का नेता ही क्यों न हो उनके निर्धारित रेट में किसी के लिये कोई छूट नही होती। इसके अलावा लेखपाल साहब अक्सर स्वजातीय स्थानीय विधायक सांसद और कुछ स्थानीय पत्रकारों का दम्भ भरते रहते हैं।

बहरहाल सहजनवां में एक आम आदमी के लिए राजस्व विभाग कि सेवाएँ और वहां से मिलने वाला न्याय ऐसे लेखपालों के कारण लगातार महंगा होता जा रहा है।

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