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गांव-गांव से खत्म होगा फाइलेरिया, सीएचओ को बनाया गया अभियान का अगुआ • फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित

 हम भारती न्यूज़

संवाददाता मोहम्मद अशरफ जिला ब्यूरो चीफ सारण बिहार 


गांव-गांव से खत्म होगा फाइलेरिया, सीएचओ को बनाया गया अभियान का अगुआ



फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित


एमडीए अभियान में सीएचओ बनेंगे सबसे मजबूत कड़ी


10 फरवरी से सर्वजन दवा सेवन अभियान


जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत आगामी 10 फरवरी से सर्वजन दवा सेवन (MDA) अभियान की शुरुआत होगी, जिसमें घर-घर जाकर लाभार्थियों को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाई जाएगी। इस अभियान को प्रभावी और सफल बनाने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। इसी उद्देश्य से जिले में सीएचओ के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया।

इस प्रशिक्षण शिविर में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए सीएचओ को तीन बैचों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान एमडीए अभियान से जुड़े सभी तकनीकी, व्यवहारिक और सामाजिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण शिविर में डब्ल्यूएचओ की जोनल कोऑर्डिनेटर डॉ. माधुरी देवराजू, जिला वेक्टर रोग सलाहकार सुधीर कुमार, पिरामल के प्रोग्राम लीड चंदन कुमार द्वारा सीएचओ को एमडीए अभियान से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान दवा सेवन की प्रक्रिया, संभावित अफवाहों से निपटने की रणनीति, लाभार्थियों को समझाने के तरीके और रिपोर्टिंग सिस्टम पर भी विशेष जोर दिया गया। इस मौके पर वीडीसीओ सतीश कुमार, सीफार के जिला प्रतिनिधि कृष्णनंदन सिंह मौजूद थे।


 एमडीए अभियान को जन-आंदोलन बनाने पर जोर

प्रशिक्षण सत्र के दौरान बताया गया कि एमडीए अभियान की सफलता केवल दवा वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह सामुदायिक जागरूकता और जनभागीदारी पर निर्भर करता है। जब तक समाज का हर वर्ग फाइलेरिया, उसके दुष्प्रभाव और दवा सेवन की आवश्यकता को नहीं समझेगा, तब तक लक्ष्य की प्राप्ति संभव नहीं है।

ग्रामीण स्तर पर सीएचओ की भूमिका अहम

प्रशिक्षण में मौजूद डॉ. माधुरी देवराजू ने कहा कि सीएचओ की पहचान ग्रामीण चिकित्सक के रूप में है। उनकी पहुंच समाज के निचले और दूरदराज़ तबकों तक है, जिससे वे लोगों को आसानी से समझा-बुझाकर दवा सेवन के लिए प्रेरित कर सकते हैं। बताया गया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर पर आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी सेविका, पंचायत प्रतिनिधि और अन्य हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना बेहद जरूरी है। इसमें सीएचओ की भूमिका सेतु की तरह होती है, जो स्वास्थ्य तंत्र और आम जनता को जोड़ती है।

 10 फरवरी से शुरू होगा सर्वजन दवा सेवन अभियान

जिला वेक्टर रोग सलाहकार सुधीर कुमार ने बताया कि 10 फरवरी से जिलेभर में सर्वजन दवा सेवन अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर पात्र लाभार्थियों को दवा खिलाएंगी और किसी भी प्रकार की भ्रांति को दूर करेंगी। फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में यह प्रशिक्षण शिविर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सीएचओ की सक्रिय भागीदारी और सामाजिक जागरूकता से ही एमडीए अभियान को जन-आंदोलन का रूप दिया जा सकता है और जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाया जा सकता है।

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