"वर्दी में भी मुझे एक देवता इंसान अदालतें सबूत देखती हैं, कानून दलीलें देखता है... लेकिन एक कद्रदान सिर्फ़ वो 'मुस्कुराहट' देखता है जो उस कलाकार ने कभी उसे दी थी!"
आज जब राजपाल यादव करोड़ों के कर्ज़ और तिहाड़ की काल-कोठरी में अपनी सबसे मुश्किल लड़ाई लड़ रहे हैं, तो मदद का एक हाथ ऐसी जगह से उठा है जहाँ से कोई उम्मीद नहीं करता। फिरोजाबाद के एएसपी अनुज चौधरी ने यह साबित कर दिया कि खाकी वर्दी के भीतर भी एक बेहद संवेदनशील दिल धड़कता है। उन्होंने किसी सरकारी फंड से नहीं, बल्कि अपनी मेहनत की सैलरी से 51,000 रुपये राजपाल भाई की मदद के लिए निकाले हैं।
अनुज चौधरी का कहना साफ़ है कि जिस कलाकार ने बरसों तक हमारी उदासियों को अपनी कॉमेडी से धोया, आज उसे तन्हा छोड़ देना नाइंसाफी होगी। वे राजपाल भाई की फिल्मों के साथ-साथ उनके विचारों के भी मुरीद हैं। उन्हें राजपाल भाई की वो बात आज भी याद है कि—"अगर आप अपनी ज़िंदगी का एक सेकंड भी वापस ला सकते हैं, तो लाकर दिखाइए, वरना समय कभी लौटकर नहीं आता।" जहाँ लोग अक्सर डूबते हुए जहाज को छोड़ देते हैं, वहीं सोनू सूद, सलमान खान और अजय देवगन जैसे दिग्गजों के बाद अब एक पुलिस अफसर का इस तरह आगे आना यह बताता है कि इंसानियत आज भी ज़िंदा है। यह मदद की राशि छोटी हो सकती है, लेकिन इसके पीछे की 'नीयत' पहाड़ से भी बड़ी है।
"क्या आपको भी लगता है कि जब दुनिया साथ छोड़ दे, तब फैन्स और ऐसे कद्रदान ही एक कलाकार की असली पूंजी होते हैं? एएसपी अनुज चौधरी के इस जज्बे को आप 10 में से कितने नंबर देंगे? कमेंट्स में अपनी दुआएं और राय ज़रूर लिखें।" ✍️ वर्दी का फर्ज़ भी, इंसानियत का कर्ज भी!
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