मैनपुरी। छोंड़गे न हम तेरा साथ, ओ साथी मरते दम तक, मरते दम नहीं अगले जन्म तक..। अभिनेता गोविन्दा और अभिनेत्री फरहा खान अभिनीत फिल्म मरते दम तक के गाना के बोल,
मैनपुरी के बेवर निवासी मोना दुबे और उनके पति संदीप के प्रेम पर सटीक बैठती नजर आ रहीं है। पति को जब गंभीर बीमारी ने जकड़ लिया, जांच में लीवर खराब होने की जानकारी सामने आने के बाद मोना ने अपना लीवर देकर अपने पति संदीप की जान बचाई।
बेवर कस्वा निवासी मोना दुबे के पति संदीप दुबे एक वर्ष पूर्व गंभीर बीमारी की चपेट में आ गए थें। उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा था। परिजन ने कई जगह उपचार दिलाया लेकिन कोई आराम नहीं मिला। जांच में पता चला कि उनका लीवर पूरी तरह से खराब हो चुका था। डाक्टरों ने सलाह दी कि संदीप का जीवन बचाने का एकमात्र रास्ता लिवर ट्रांसप्लांट है। डॉक्टर की बात सुनकर परिवार के लोग चिंतित हो गए मानो उनके ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो। डॉक्टर की राय पर मोना ने हिम्मत दिखाई। उन्होंने डॉक्टर से कहा कि वह अपने पति की जान बचाने के लिए कुछ भी दान करने को तैयार है। डॉक्टरों ने चिकित्सकीय प्रक्रिया के बाद मोना के लीवर का एक हिस्सा संदीप को ट्रांसप्लांट किया इससे संदीप की जान बच गई। आज दोनों प्रेम से एक दूसरे के साथ रह रहे हैं।
*मोना की हिम्मत और प्यार ने हालात बदल दिए*
पति की गंभीर बीमारी ने परिवार को झकझोर कर रख दिया, लेकिन मोना की हिम्मत और प्यार ने हालात बदल दिए। जब डाक्टर की सलाह पर मोना लिवर ट्रांसप्लांट के लिए राजी हुई तो परिवार के लोग चिंतित थे कि कहीं बेटे साथ बहू का स्वास्थ्य भी खराब न हो जाए। लेकिन सात जन्मो का साथ निभाने का वादा करने वाली मोना हर पल साहस के साथ खड़ी थी। उसके साहस को देखकर परिवार के लोग भी लीवर ट्रांसप्लांट के लिए राजी जो गए। दिल्ली के आईएलबीएस (इंस्टिट्यूट आफ लीवर एंड बिलिअरी साइसेंस) में सफल आपरेशन के बाद उनके पति को नया जीवन मिला। अब वह धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहे हैं।
*पति के साथ खड़े होना पत्नी का धर्म*
पति-पत्नी का रिश्ता जीवन साथी के रूप में जाना जाता है। परेशानियों में पति के लिए खड़े रहना पत्नी का धर्म है। यदि मेरे शरीर का कोई हिस्सा उनकी जिंदगी बचा सकता था तो इससे बड़ा सौभाग्य मेरे लिए क्या हो सकता है।- *मोना दुबे, बेवर मैनपुरी।*
फोटो परिचय- मोना दुबे।
