लोकसभा में वित्त मंत्री के बयान पर भड़के कर्मचारी
यूनिफाइड पेंशन स्कीम में बदलाव से इनकार कर्मचारियों के साथ विश्वासघात: रूपेश श्रीवास्तव
पुरानी पेंशन की बहाली के लिए सड़क से सदन तक होगा निर्णायक संघर्ष: मदन मुरारी शुक्ल
हम भारती न्यूज़ से उत्तर प्रदेश चीफ व्यूरो प्रमुख धर्मेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की ख़ास ख़बर
गोरखपुर केंद्र सरकार द्वारा संसद में यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) में किसी प्रकार का बदलाव करने अथवा उसे बदलने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन न होने संबंधी बयान पर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे कर्मचारियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ बताया है। सरकार के इस बयान के विरोध में परिषद की एक आपात बैठक परिषद कार्यालय में आयोजित की गई, जिसमें सरकार के रुख की घोर निंदा करते हुए पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली के लिए निर्णायक आंदोलन का आह्वान किया गया।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए परिषद के अध्यक्ष रूपेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि केंद्र सरकार का यह रुख कर्मचारियों के लिए बेहद निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि “पुरानी पेंशन कर्मचारियों का अधिकार है। सरकार को कर्मचारियों की भावनाओं को समझना होगा। यदि सरकार पुरानी पेंशन बहाल नहीं करती है तो हमें सड़क पर उतरकर संघर्ष करना होगा और यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक पुरानी पेंशन बहाल नहीं हो जाती।”
परिषद के महामंत्री मदन मुरारी शुक्ला ने कहा कि सरकार कर्मचारियों के इम्तिहान की हद कर रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी वर्षों तक सरकार की नीतियों और योजनाओं को सफल बनाने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करते हैं, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद उनके भविष्य को लेकर सरकार का उदासीन रवैया अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि UPS, NPS और OPS के बीच बार-बार बदलाव एवं असमंजस की स्थिति पैदा करने के बजाय सरकार को कर्मचारियों की स्पष्ट मांग—पुरानी पेंशन योजना की बहाली—पर निर्णय लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि समाचार पत्र में प्रकाशित केंद्र सरकार के बयान से यह स्पष्ट है कि फिलहाल UPS में बदलाव की कोई योजना नहीं है। ऐसे में कर्मचारियों की पेंशन संबंधी मूल चिंता का समाधान नहीं होता। सरकार को यह समझना चाहिए कि सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक और सुनिश्चित पेंशन कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है।
परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पंडित श्याम नारायण शुक्ला ने कहा कि पेंशन के मुद्दे पर अब आर-पार की लड़ाई लड़नी होगी। उन्होंने कहा कि कर्मचारी संगठनों को एकजुट होकर सरकार पर दबाव बनाना होगा और पुरानी पेंशन की बहाली के लिए व्यापक आंदोलन खड़ा करना होगा।
परिषद के संरक्षक अशोक पांडेय ने कहा कि सरकार को कर्मचारियों की मांग को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि पेंशन कोई खैरात नहीं, बल्कि कर्मचारी द्वारा अपने पूरे सेवाकाल में किए गए योगदान के बाद मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा है।
बैठक में नेताओं ने कहा कि 1 अप्रैल 2025 से लागू UPS में केंद्र सरकार द्वारा कर्मचारियों को सुनिश्चित पेंशन सहित कई प्रावधान किए गए हैं, लेकिन कर्मचारी संगठनों की मूल मांग पुरानी पेंशन योजना की बहाली है। परिषद का मानना है कि कर्मचारियों को ऐसी पेंशन व्यवस्था चाहिए जिसमें सेवानिवृत्ति के बाद उनके भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो और उन्हें बाजार आधारित जोखिमों का सामना न करना पड़े।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि सरकार ने पुरानी पेंशन योजना की बहाली की दिशा में शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की तो राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से तेज करेगी तथा आवश्यकता पड़ने पर सड़क पर उतरकर निर्णायक संघर्ष किया जाएगा।
बैठक में प्रमुख रूप से रूपेश कुमार श्रीवास्तव, मदन मुरारी शुक्ला, पंडित श्याम नारायण शुक्ला, अशोक पांडेय गोविंद जी राजेश मिश्रा अनूप कुमार अनिल द्विवेदी सुभाष पांडेय इंजीनियर सौरभ श्रीवास्तव रामधनी पासवान सहित परिषद के अन्य पदाधिकारी एवं कर्मचारी नेता उपस्थित रहे।
