रेलवे बोर्ड PNM बैठक: NFIR के नेतृत्व में पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारियों की प्रमुख माँगों को प्रमुखता से उठाया गया:
हम भारती न्यूज़ से उत्तर प्रदेश चीफ व्यूरो प्रमुख धर्मेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की ख़ास ख़बर
गोरखपुर नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित रेलवे बोर्ड स्तर की पीएनएम बैठक में कर्मचारियों से जुड़े कई गंभीर, नीतिगत और ज्वलंत मुद्दों को पूरे जोर-शोर से रखा गया।
पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ के महामंत्री तथा NFIR के सहायक महामंत्री श्री विनोद कुमार राय ने NFIR के सम्मानित महामंत्री डॉ. एम. राघवैया जी के कुशल प्रतिनिधित्व में रेलवे बोर्ड के समक्ष पूर्वोत्तर रेलवे (NER) के तीनों मंडलों—लखनऊ, वाराणसी, इज़्ज़तनगर—तथा मुख्यालय स्तर पर व्याप्त विसंगतियों एवं नीतिगत समस्याओं को मजबूती से प्रस्तुत किया।
बैठक में उठाये गये प्रमुख बिंदु और मांगें निम्नलिखित हैं:
कर्मचारी संघ ने इस बात पर गहरा असंतोष व्यक्त किया कि वर्तमान में 7वें वेतन आयोग का अंतिम चरण चल रहा है और 8वां वेतन आयोग (8th CPC) का गठन प्रस्तावित है। इसके बावजूद, रेलकर्मियों को दिया जाने वाला उत्पादकता आधारित बोनस (PLB) आज भी 6ठे वेतन आयोग के न्यूनतम वेतन (₹7000) के आधार पर ही गणना करके दिया जा रहा है। संघ ने मांग की कि बोनस की गणना 7वें वेतन आयोग के न्यूनतम वेतन (₹18000) के अनुसार की जाए और 8वें वेतन आयोग के गठन की तत्काल घोषणा करते हुए अंतरिम राहत दी जाए।
टीटीई विश्राम गृह सुविधा: ट्रेनों में वृद्धि के अनुसार TTE रनिंग रूम्स में बेड की संख्या बढ़ाई जाए। काठगोदाम में एस्कॉर्टिंग TTE के लिए आरक्षित रिटायरिंग रूम्स की बाहरी यात्रियों हेतु ऑनलाइन बुकिंग तुरंत बंद कर केवल रेल स्टाफ के लिए आरक्षित रखी जाए, रेलवे बोर्ड सर्कुलर 71/2018 के तहत सभी विश्राम गृहों में AC कमरे और मेस की व्यवस्था हो। गोरखपुर रेस्ट हाउस को खुले हॉल (प्लेटफ़ॉर्म 9) के बजाय सुरक्षित परिसर में शिफ्ट किया जाए, जहाँ कैश व HHT चोरी का खतरा न हो।
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रेलकर्मियों के बच्चों हेतु पास नियमों में 25 वर्ष की आयु-सीमा और अध्ययन/रोजगार संबंधी विसंगतियों को दूर कर इसे मेडिकल नियमों की तरह 25 वर्ष तक के सभी आश्रित बच्चों हेतु सुसंगत बनाया जाए। साथ ही माता-पिता (Parents) के पास पात्रता एवं आश्रितता मानदंडों का सरलीकरण किया जाए।
तथा संघ ने मांग रखी कि कर्मचारियों के 'सुविधा पास' पर कन्फर्म बर्थ आवंटन की सुविधा ऑटोमेटेड प्रणाली से सुनिश्चित हो। इसके अतिरिक्त, सभी विभागों (विशेषकर लोको, मिनिस्टीरियल, ट्रैकमैन और आर्टिजन) में पदोन्नति (Promotion) की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी एवं ऑनलाइन बनाया जाए, जिससे मानवीय हस्तक्षेप व प्रशासनिक विलंब समाप्त हो सके। इसके साथ हीं
कैडर विसंगतियां, पदोन्नति एवं संरक्षा संबंधी मांगें
विभागीय परीक्षाएं एवं GDCE: पूर्वोत्तर रेलवे में departmental परीक्षाओं के प्राप्तांक सार्वजनिक किए जाएं। वर्ष 2026 की GDCE अधिसूचना (NER/RRC/GDCE/2026) में मात्र 134 पदों की जगह 25% कोटे का सही आकलन कर पदों की संख्या बढ़ाई जाए।
ओवरटाइम व भत्ते: लखनऊ मंडल में TL/AC कर्मचारियों के ओवरटाइम TPT एरियर का तत्काल भुगतान हो। लोको रनिंग स्टाफ के 'ड्राई सेल (टॉर्च बैटरी) भत्ते' का वर्तमान बाजार दर के अनुरूप संशोधन किया जाए।
नाइट ड्यूटी अलाउंस (NDA): पूर्वोत्तर रेलवे द्वारा NDA पर लगाई गई '13 यूनिट' की स्थानीय सीलिंग हटाई जाए तथा ₹43,600/- बेसिक पे की सीलिंग समाप्त करने हेतु बोर्ड को सिफारिश भेजी जाए।
स्वास्थ्य एवं महिला रेलकर्मी: लंबे समय से गंभीर अस्वस्थ कर्मचारियों का समयबद्ध 'मेडिकल डीकैटेगराइजेशन' कर वेतन बहाली हो। महिला कर्मियों हेतु बंद पड़े शिशुगृह को पुनः चालू किया जाए और पृथक शौचालयों का निर्माण हो।
ट्रैकमैन एवं जोखिम भत्ता: पटरियों की देखभाल करने वाले ट्रैक मेंटेनर्स को Level-6 (₹4200 GP) तक पदोन्नति के अवसर दिए जाएं तथा उनका 'रिस्क एंड हार्डशिप अलाउंस' बढ़ाया जाए। 220V से 33kV HT लाइनों पर कार्य करने वाले इलेक्ट्रिकल (जनरल/पावर) स्टाफ को भी जोखिम भत्ता स्वीकृत किया जाए।
ओपीएस (OPS) बहाली: एनपीएस (NPS) / यूपीएस (UPS) की जगह पुरानी गारंटीकृत पेंशन योजना (OPS) को पुनः बहाल करने की जोरदार वकालत की गई।
महामंत्री डॉ. एम. राघवैया एवं श्री विनोद कुमार राय ने स्पष्ट किया कि यदि इन नीतिगत विसंगतियों और कर्मचारी हितों से जुड़ी मांगों का शीघ्र समाधान नहीं निकाला गया, तो संगठन कर्मचारी अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगा।

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