हम भारती न्यूज़ मंडल व्यूरो चीफ राजेश्वर सिंह संभल से खास खबर
एनआरएलएम का मिला साथ तो खुद के पैरों पर खड़ी हुईं यादवती, खुद के दम पर संवार रहीं चार बच्चों का भविष्य*
–योजना से जुड़कर साधारण गृहणी से बनीं सफल उद्यमी, 10 अन्य महिलाओं को भी दिखाई रोजगार की राह
–मशीन लगाकर शुरू किया मसाला सेवई का कारोबार, त्योहारों पर तिरंगा राखी और नमकीन से भी कर रहीं अच्छी कमाई
संभल, 27 अगस्त। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का एक मजबूत जरिया बन चुका है। बनियाखेड़ा ब्लॉक के ग्राम जैरौई हयात नगर की रहने वाली 34 वर्षीय यादवती इसकी एक जीती-जागती मिसाल हैं। साल 2021 से पहले जो यादवती केवल घर की चारदीवारी तक सीमित थीं, आज वह एक सफल महिला उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। त्योहारों के अनुसार उत्पाद बनाकर कलेक्ट्रेट में स्टॉल लगाने से लेकर अपने चार बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च वह खुद उठा रही हैं। एक साधारण गृहणी से 'नई किरण स्वयं सहायता समूह' की सदस्य और फिर कृषि आजीविका सखी बनने तक का उनका यह सफर अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गया है।
घर की दहलीज से निकलकर ऐसे तय किया सफर
यादवती बताती हैं कि साल 2021 से पहले वह घर पर ही रहती थीं और उनके पास आय का कोई साधन नहीं था। परिवार की माली हालत भी अच्छी नहीं थी। इसके बाद वह एनआरएलएम योजना के तहत 'नई किरण स्वयं सहायता समूह' से जुड़ीं। इंटर तक शिक्षा प्राप्त कर चुकीं यादवती को उनके कौशल को देखते हुए ब्लॉक स्तर पर कृषि आजीविका सखी के रूप में चुना गया। अपने व्यवसाय की शुरुआत करने के लिए उन्होंने सबसे पहले 50 हजार रुपये का लोन लिया और अपने घर पर ही एक जनरल स्टोर खोला। अपनी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने मात्र छह महीने के भीतर इस पूरे लोन का भुगतान कर दिया। इस सफलता ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया और उन्होंने अपने समूह की 10 अन्य महिलाओं को भी बकरी व भैंस पालन जैसे रोजगारों से जोड़कर उन्हें भी स्वावलंबी बनने की राह दिखाई।
त्योहारों के बाजार पर रहती है पैनी नजर
बाजार की मांग और त्योहारों के अनुरूप अपने व्यवसाय को ढालने में यादवती को महारत हासिल है। वह दीपावली पर मोमबत्तियां, होली पर गुलाल और रक्षाबंधन के लिए विशेष रूप से तिरंगा व मोती वाली राखियां तैयार करती हैं। आम दिनों में व्यवसाय को गति देने के लिए वह घर पर ही बेसन सेव, आलू चिप्स और चने की दाल की नमकीन बनाती हैं। हाल ही में उन्होंने अपने कारोबार को और विस्तार देते हुए 20 हजार रुपये का एक नया लोन लिया है, जिससे उन्होंने 15 दिन पहले ही घर में मसाला सेवइयां बनाने की मशीन लगाई है। अब वह बड़े स्तर पर सेवइयां भी तैयार कर बाजार में उतार रही हैं।
प्रशासन के सहयोग से मुनाफे को मिली रफ्तार
यादवती की इस सफलता में स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी एक मजबूत स्तंभ रही है। उनके बनाए उत्पादों को सीधा बाजार उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन द्वारा कलेक्ट्रेट सभागार में विशेष स्टॉल लगवाए जाते हैं। यादवती के अनुसार, पिछले साल रक्षाबंधन के अवसर पर जब उन्होंने कलेक्ट्रेट में स्टॉल लगाया था, तो महज तीन दिन के भीतर उन्हें 20 हजार रुपये की शानदार बचत हुई थी। इस बार भी रक्षाबंधन के मद्देनजर उनका स्टॉल कलेक्ट्रेट में लगा हुआ है, जहां उनकी बनाई राखियां, नमकीन और नई मशीन से तैयार मसाला सेवइयां हाथों-हाथ बिकने की उम्मीद हैं। प्रशासन का यह कदम महिलाओं को सीधे ग्राहकों से जोड़ने में बेहद कारगर साबित हो रहा है।
खुद उठा रहीं बच्चों का खर्च, आगे की भी है ठोस तैयारी
आर्थिक स्थिति सुधरने के बाद यादवती के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। उनके परिवार में पति और चार बच्चे (तीन लड़कियां और एक लड़का) हैं। पति ट्यूशन पढ़ाने के साथ-साथ खेती और टेंट का काम भी देखते हैं। अब यादवती अपने बच्चों की पढ़ाई से लेकर परिवार की सभी जरूरतों का खर्च खुद अपने कंधों पर उठा रही हैं। उनका विजन यहीं तक सीमित नहीं है। यादवती का कहना है कि भविष्य में वह अपने कारोबार को और बड़ा करना चाहती हैं। इसके लिए उन्होंने प्रशासन के सामने सेनेटरी पैड बनाने की मशीन लगाने की योजना का प्रस्ताव भी रखा है, ताकि ग्रामीण महिलाओं को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए जा सकें।
खुद पर रखें भरोसा, हर मंजिल होगी आसान: यादवती
सफल उद्यमी यादवती का कहना है कि घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर अपनी पहचान बनाना शुरुआत में थोड़ा मुश्किल जरूर लगता है, लेकिन दृढ़ निश्चय से हर मंजिल आसान हो जाती है। मैं ग्रामीण क्षेत्र की हर महिला से यही अपील करूंगी कि वे झिझक छोड़ें, खुद पर भरोसा रखें और सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनें।
वर्जन
एनआरएलएम ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का एक मजबूत जरिया है। जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य इन महिलाओं के हुनर को निखारना और उनके उत्पादों को सीधा बाजार उपलब्ध कराना है। इसी कड़ी में कलेक्ट्रेट व अन्य प्रमुख स्थानों पर इनके स्टॉल लगवाए जा रहे हैं, ताकि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो और सीधा मुनाफा महिलाओं को मिले। यादवती जैसी महिलाएं समाज के लिए एक मिसाल हैं और प्रशासन ऐसी हर मातृशक्ति को प्रोत्साहित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
–अंकित खंडेलवाल, जिलाधिकारी, संभल

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