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​पूर्वोत्तर रेलवे में कार्मिक विभाग के उदासीन रवैये से रेल कर्मचारियों का हों रहा आर्थिक नुकसान: विनोद कुमार राय

 ​पूर्वोत्तर रेलवे में कार्मिक विभाग के उदासीन रवैये से रेल कर्मचारियों का हों रहा आर्थिक नुकसान: विनोद कुमार राय



हम भारती न्यूज़ से उत्तर प्रदेश चीफ व्यूरो प्रमुख धर्मेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की ख़ास ख़बर


गोरखपुर ​पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ (PRKS) के महामंत्री तथा नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन (NFIR) के सहायक महामंत्री विनोद कुमार राय ने पूर्वोत्तर रेलवे के कार्मिक विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुये कहा कि प्रशासन की उदासीनता और रेलवे बोर्ड के नियमों की अनदेखी के कारण कर्मचारी गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। संगठन द्वारा समय-समय पर पत्राचार करने और वार्ता के माध्यम से ध्यानाकर्षण कराने के बाद भी कार्मिक विभाग द्वारा कोई सकारात्मक परिणाम देखने कों नहीं मिल रहें है।

​श्री राय ने कहा कि रेलवे बोर्ड द्वारा विभिन्न कोटियों में पदोन्नति, परीक्षाओं और पैनल निर्माण के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि योग्य कर्मचारियों को उनका हक मिल सके और पद खाली न रहें। भारतीय रेलवे के अन्य जोनों में इन प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से लागू कर योग्य कर्मचारियों को अवसर दिए जा चुके हैं, परंतु पूर्वोत्तर रेलवे में बोर्ड के आदेशों की अवहेलना की जा रही है। पर्याप्त संख्या में रिक्तियां और योग्य कर्मचारी उपलब्ध होने के बावजूद विगत कई वर्षों से पदोन्नतियां लंबित रखी गई हैं। इसके अलावा 25% और 50% एलडीसीई कोटे की परीक्षाओं के उपरांत अभ्यर्थियों के प्राप्तांक सार्वजनिक करने के बोर्ड के स्पष्ट नियमों को भी दरकिनार किया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों के मन में पूरी प्रक्रिया को लेकर अविश्वास और असंतोष व्याप्त हो रहा है।

​महामंत्री ने एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दे पर ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि गंभीर बीमारियों और स्वास्थ्य कारणों से मूल पद पर कार्य करने में असमर्थ कर्मचारियों के प्रति कार्मिक विभाग का रवैया बेहद उदासीन है। जो कर्मचारी लंबे समय से अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं, उन्हें महीनों-महीनों और एक-एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी वैकल्पिक पद पर समायोजित (डी-कैटेगराइज) नहीं किया जा रहा है। लगातार सिक रहने के कारण कर्मचारियों का अवकाश खाता खाली हो चुका है और उनका वेतन पूरी तरह से बंद है। बीमारी के इलाज के खर्च के साथ वेतन न मिलने के कारण कई रेल कर्मियों के परिवारों के सामने जीवन-यापन का भारी संकट खड़ा हो गया है।

​उन्होंने आगे कहा कि रेल कर्मचारी पूरी निष्ठा और मेहनत के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन समय पर पदोन्नति, पारदर्शी व्यवस्था और चिकित्सीय सहायता न मिलने से वे मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं। अपनी जायज मांगों के लिए कर्मचारियों को बार-बार छुट्टी लेकर कार्मिक विभाग के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिसका सीधा असर उनके रेल संचालन से जुड़े कार्यों पर पड़ता है। पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ यह मांग करता है कि कार्मिक विभाग तत्काल प्रभाव से लंबित पदोन्नतियों की प्रक्रिया पूरी करे, परीक्षाओं के अंक सार्वजनिक करे और अस्वस्थ कर्मचारियों का शीघ्र समायोजन सुनिश्चित करे।

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