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मंडल व्यूरो चीफ राजेश्वर सिंह
संभल से खास खबर
संभल में कल लगेगी साल की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत, बिना खर्च एक ही दिन में सुलझेंगे वर्षों पुराने विवाद*
–विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम-1987 के तहत चंदौसी मुख्यालय समेत अदालतों में सुबह 10 बजे से होगा वादों का निस्तारण
–बिजली-पानी बिल, बैंक रिकवरी, ट्रैफिक चालान और वैवाहिक मामलों में सुलह-समझौते के लिए प्रशासन ने कसी कमर
संभल (चंदौसी), 11 सितंबर। जनपद में वर्षों से कोर्ट-कचहरी की तारीखों और भारी आर्थिक बोझ से जूझ रहे वादकारियों के लिए शनिवार 12 सितंबर का दिन बड़ी राहत लेकर आ रहा है। विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत जनपद संभल (मुख्यालय चंदौसी) स्थित न्यायालय परिसर और संबंधित विभागों में वर्ष 2026 की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन सुबह 10 बजे से किया जाएगा। इस अदालत की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें वादकारियों को एक भी रुपया कोर्ट फीस नहीं देनी होगी और आपसी रजामंदी से मामलों का मौके पर ही अंतिम निस्तारण कर दिया जाएगा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, संभल ने आमजन की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन और सूचना विभाग को प्रमुख सार्वजनिक स्थलों, कार्यालयों और डिजिटल माध्यमों पर महाप्रचार अभियान चलाने के कड़े निर्देश दिए हैं, ताकि जिले के अंतिम छोर तक के जरूरतमंद वादकारी इसका सीधा फायदा उठा सकें।
बिजली, पानी, चेक बाउंस और चालान से परेशान लोगों को सीधी राहत
जिले के आम नागरिकों के रोजमर्रा के जीवन से जुड़े विवादों को इस लोक अदालत में प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाएगा। इसमें विद्युत वितरण निगम के विवादित व लंबित बिजली बिल, जल संस्थान के पानी बिल, टेलीफोन (बीएसएनएल) के बकाये, बैंकों और एनबीएफसी के लोन रिकवरी मामले सीधे तौर पर रखे जाएंगे। इसके अलावा शमनीय प्रकृति के ट्रैफिक चालान, चेक बाउंस (धारा 138 एनआई एक्ट), मोटर दुर्घटना दावा (एमएसीटी), श्रम विवाद, उपभोक्ता फोरम के मामले और राजस्व संबंधी मामलों का भी मौके पर निस्तारण होगा। वहीं, परिवारों को टूटने से बचाने के लिए तलाक के मामलों को छोड़कर वैवाहिक और पारिवारिक विवादों को सुलह-समझौते के जरिए हल कराया जाएगा।
न कोई जीतेगा, न कोई हारेगा: सिविल कोर्ट की डिक्री जैसा होगा फैसला
राष्ट्रीय लोक अदालत में होने वाले फैसलों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण वातावरण में समझौता कराया जाता है, जिससे किसी की हार नहीं होती और आपसी रंजिश हमेशा के लिए खत्म हो जाती है। लोक अदालत की पीठ द्वारा पारित आदेश (अवार्ड) सिविल कोर्ट की डिक्री के समान पूर्णतः कानूनी और बाध्यकारी होता है। इसके खिलाफ किसी भी ऊपरी अदालत में कोई अपील नहीं होती, जिससे भविष्य में नए मुकदमे या लंबी अदालती प्रक्रियाओं का झंझट समाप्त हो जाता है। यदि किसी मामले में दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाती, तो संबंधित पत्रावली को बिना किसी नुकसान के वापस नियमित न्यायालय में विचार के लिए भेज दिया जाता है।
प्रशासनिक मशीनरी अलर्ट: चौपालों से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक महाप्रचार
जिले में अधिक से अधिक लोगों को इस अवसर से जोड़ने के लिए प्रभारी सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण संभल (चंदौसी) ने नगर मजिस्ट्रेट/नोडल अधिकारी (प्रशासन) और जिला सूचना अधिकारी को पत्रांक 170/2026 के तहत स्पष्ट कार्ययोजना भेजी है। जनपद के सभी प्रमुख सार्वजनिक स्थलों, तहसील परिसरों, विकास खंड कार्यालयों और नगर निकायों में नागरिक-अनुकूल पोस्टर लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही सरकारी वेबसाइटों, सोशल मीडिया हैंडल्स और ऑडियो जिंगल के माध्यम से गांव-गांव तक जागरूकता पहुंचाई जा रही है। बैंक, बीमा कंपनियां, विद्युत निगम और परिवहन विभाग जैसे जन-सरोकार से जुड़े विभागों को विशेष रूप से सक्रिय किया गया है, ताकि बकायेदार और पीड़ित व्यक्ति बिना किसी डर के सीधे संपर्क कर सकें।
चंदौसी न्यायालय या तहसील समिति से करें सीधा संपर्क
लोक अदालत में अपने मुकदमों को शामिल कराने के लिए प्रक्रिया को बेहद सरल रखा गया है। जनपद का कोई भी नागरिक या वादकारी अपने वाद की प्रकृति को समझकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) संभल स्थित चंदौसी या अपनी निकटतम तहसील विधिक सेवा समिति (टीएलएससी) से तुरंत संपर्क कर सकता है। वहां मामले की पात्रता जांचने के बाद उसे लोक अदालत की पीठ के समक्ष समझौते हेतु सूचीबद्ध करा दिया जाता है। शनिवार सुबह 10 बजे से शुरू होने वाली इस अदालत में दोनों पक्षों की उपस्थिति में पीठ द्वारा सुलह वार्ता कराई जाएगी और आपसी सहमति बनते ही तुरंत अंतिम आदेश पारित कर दिया जाएगा।
