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मंडल व्यूरो चीफ राजेश्वर सिंह
संभल से खास खबर
डी.आर. रिसोर्ट, बहजोई में जनपद स्तरीय जागरूकता कार्यक्रम एवं खरीफ उत्पादकता गोष्ठी आयोजित
सम्भल (बहजोई), 21 सितम्बर 2026
प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन फॉर इन-सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेजिड्यू योजनान्तर्गत फसल अवशेष (पराली) जलाने से होने वाले दुष्परिणामों के प्रति किसानों को जागरूक करने तथा कृषि सूचना तंत्र के सुदृढ़ीकरण एवं कृषक जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत आज जनपद स्तरीय जागरूकता कार्यक्रम एवं खरीफ उत्पादकता गोष्ठी का आयोजन डी.आर. रिसोर्ट, बहजोई में किया गया। जिलाधिकारी अंकित खण्डेलवाल के निर्देशन में कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी गोरखनाथ भट्ट द्वारा की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. अनामिका यादव, माननीय जिला पंचायत अध्यक्ष, सम्भल तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में अजीत कुमार राजू यादव, पूर्व विधायक (पूर्व मंत्री), गुन्नौर उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इसके उपरांत मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि द्वारा कृषि विभाग सहित विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया गया।
पराली जलाने से मिट्टी एवं पर्यावरण को होने वाले नुकसान की दी जानकारी
तकनीकी सत्र में कृषि वैज्ञानिक डॉ. महावीर सिंह ने किसानों को फसल अवशेष एवं अन्य कृषि अपशिष्ट जलाने से होने वाले दुष्परिणामों की जानकारी देते हुए फसल अवशेष प्रबंधन के विभिन्न उपाय बताए। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष खेत में जलाने से मिट्टी की ऊपरी परत अत्यधिक गर्म होने के कारण उसमें मौजूद केंचुए एवं लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट होते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है तथा वायु प्रदूषण भी बढ़ता है। उन्होंने फसल अवशेषों को खेत में मिलाकर अथवा अन्य वैज्ञानिक विधियों से प्रबंधन करने के लाभों की जानकारी दी।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. अरविन्द कुमार ने एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, कीट एवं रोग प्रबंधन तथा संतुलित उर्वरक उपयोग के संबंध में किसानों को विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने किसानों से मृदा परीक्षण कराने तथा फसल की आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करने का आह्वान किया।
किसानों से पराली न जलाने और आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करने की अपील
उप कृषि निदेशक, सम्भल अरुण कुमार त्रिपाठी ने किसानों से अपील की कि फसल अवशेष/पराली को खेतों में न जलाएं। उन्होंने बताया कि पराली प्रबंधन के लिए कृषि विभाग द्वारा किसानों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने फसल अवशेषों को खेत में ही प्रबंधित करने से मृदा की उर्वरता एवं उत्पादकता बनाए रखने में होने वाले लाभों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि फसल अवशेष जलाने पर क्षेत्रफल के अनुसार दण्ड का प्रावधान है। 02 एकड़ से कम क्षेत्र में पराली जलाने पर ₹5,000, 02 से 05 एकड़ क्षेत्र में ₹10,000 तथा 05 एकड़ से अधिक क्षेत्र में ₹30,000 प्रति घटना अर्थदण्ड लगाया जा सकता है।
उप कृषि निदेशक ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेशों के अनुपालन में फसल अवशेष जलाने से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम के लिए प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। किसानों को पराली प्रबंधन हेतु आधुनिक कृषि यंत्रों जैसे सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, मल्चर, हैप्पी सीडर, रोटरी स्लैशर, जीरो टिल सीड ड्रिल, सुपर सीडर, स्ट्रॉ रीपर, बेलिंग मशीन, रीपर कम बाइंडर एवं हाइड्रोलिक रिवर्सिबल एम.बी. प्लाउ आदि के उपयोग की जानकारी दी गई।
मुख्य अतिथि ने सामूहिक सहभागिता का किया आह्वान
मुख्य अतिथि डॉ. अनामिका यादव ने किसानों एवं उपस्थित जनसमुदाय से फसल अवशेष न जलाने की अपील करते हुए प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि खेतों में पराली जलाने से वायु प्रदूषण के साथ-साथ भूमि की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित होती है। उन्होंने किसानों से फसल अवशेष प्रबंधन की वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करने की अपील की।
विशिष्ट अतिथि श्री अजीत कुमार राजू यादव ने किसानों को शासन द्वारा संचालित विभिन्न किसान कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए आधुनिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने तथा फसल विविधीकरण अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने पराली न जलाने की अपील करते हुए पर्यावरण एवं भूमि की उर्वरा शक्ति संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास का आह्वान किया।
सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से जनभागीदारी पर दिया जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मुख्य विकास अधिकारी गोरखनाथ भट्ट ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ के संबंध में उपस्थित जनसमुदाय को जानकारी देते हुए कहा कि यह अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच विश्वास को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण तथा जनकल्याणकारी योजनाओं को सफल बनाने के लिए जनभागीदारी आवश्यक है। उन्होंने उपस्थित लोगों से अपने गांव एवं आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने, जल संरक्षण करने तथा अधिक से अधिक पौधे लगाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि गांव की स्वच्छता केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। सामूहिक सहभागिता से ही स्वच्छ, स्वस्थ एवं समृद्ध जनपद का निर्माण संभव है।
कृषि एवं पशुपालन विभाग की योजनाओं की दी जानकारी
कार्यक्रम में उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अजय कुमार द्वारा पशुपालन विभाग द्वारा संचालित विभिन्न महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारी दी गई। उन्होंने नंदिनी कृषक समृद्धि योजना, पशुधन बीमा योजना एवं मुख्यमंत्री सहभागिता योजना सहित अन्य योजनाओं से किसानों को अवगत कराया।
कार्यक्रम में उपस्थित किसानों को कृषि विभाग एवं संबंधित विभागों द्वारा संचालित योजनाओं, फसल अवशेष प्रबंधन तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के संबंध में जानकारी प्रदान की गई। चयनित कृषकों, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की सभी 23 किस्तें प्राप्त करने वाले लाभार्थियों एवं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को प्रशस्ति पत्र भी वितरित किए गए।
कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से आए किसान, कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, संबंधित विभागों के अधिकारी तथा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां उपस्थित रहीं। अंत में उप कृषि निदेशक, सम्भल द्वारा सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया।
जारी जिला सूचना कार्यालय सम्भल।
