सारण में SDM के रोक के बाद भी इमामबाड़ा की जमीन पर निर्माण, अल्पसंख्यक आयोग ने DM-SP को लिखा पत्र, थाना प्रभारी गरखा पर अनुशासनहीनता का आरोप
गरखा थाना अंतर्गत ग्राम+पोस्ट केवानी में स्थित वर्षों पुराने इमामबाड़ा की जमीन पर असामाजिक तत्वों द्वारा अवैध अतिक्रमण और निर्माण का मामला अब बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग, पटना तक पहुँच गया है। आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक, सारण को तत्काल कार्रवाई कर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है।
यह है पूरा मामला:
आवेदक मो० अशरफ, ग्राम-केवानी, थाना-गरखा के अनुसार मौजा केवानी में सर्वे खाता सं०-37, रकबा 5 धूर एवं सर्वे खाता सं०-68, रकबा 13 धूर पर वर्षों पुराना इमामबाड़ा स्थित है, जिस पर वर्षों से मुस्लिम समुदाय के लोग इबादत करते आ रहे हैं।
आरोप है कि इसी गाँव के निवासी शिव बचन राम, पिता-स्व० रत्न राम, राजकुमारी देवी, पति-शिव बचन राम एवं दिलीप राम, पिता-शिव बचन राम अपने अन्य सहयोगियों के साथ उक्त इमामबाड़ा की भूमि के कुछ भाग पर जबरन अतिक्रमण कर निर्माण कार्य करा रहे हैं।
इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन को कई बार दी गई लेकिन निर्माण पर रोक नहीं लग सका, जिससे मुस्लिम समुदाय में रोष व्याप्त है।
SDM ने भी लगाई थी रोक, फिर भी नहीं माना:
इस संबंध में न्यायालय अनुमंडल दण्डाधिकारी, सदर छपरा द्वारा पहले ही अनादेश ज्ञापांक-1103 दिनांक-25-03-2026 द्वारा विवादित स्थल पर निर्माण कार्य को स्थगित करते हुए आने-जाने पर भी कार्रवाई के निष्पादन तक रोक लगा दी गई थी।
इसके बाद बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने भी अपने पत्रांक-618 दिनांक-13-04-2026 द्वारा कार्रवाई का निर्देश दिया था, जिसके बाद कार्य स्थगित कर दिया गया था।
आयोग का आरोप - थाना प्रभारी ने ही फिर से निर्माण शुरू करा दिया:
आयोग के ताजा पत्र संचिका संख्या बि० रा० अ०आ०/परिवाद-2-07/2026...1374 दिनांक 03/09/2026 में उल्लेख है कि आवेदक मो० अशरफ द्वारा आयोग को सूचित किया गया कि दिनांक-30-08-2026 को थाना प्रभारी गरखा के सहयोग से निर्माण कार्य न केवल पुनः आरम्भ करवा दिया गया बल्कि आवेदक को ही कहा गया कि आप किसी भी स्थिति में निर्माण कार्य के स्थगन हेतु टेलिफोनिक/मौखिक सूचना नही देंगे।
पत्र में आगे कहा गया है कि आयोग कार्यालय द्वारा भी जब थाना प्रभारी गरखा को टेलिफोनिक सूचना देते हुए यह जानने का प्रयास किया गया कि कार्य किस आदेश से पुनः आरम्भ करवाया गया तो उनके द्वारा कुछ भी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। आयोग ने इसे चिंता का विषय बताते हुए एक पदाधिकारी की अनुशासनहीनता एवं स्वेच्छाचारिता का द्योतक माना है।
साम्प्रदायिक सद्भाव बिगड़ने का खतरा:
आयोग ने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि "आवेदन के अवलोकन से यह भी प्रतीत होता है कि उपर्युक्त मामला काफी संवेदनशील एवं साम्प्रदायिक सद्भाव से जुड़ा है जो कभी भी हिंसक रूप ले सकता है।"
अतएव आयोग के सदस्य सचिव द्वारा निर्देश दिया गया है कि इस संवेदनशील मामले में अविलम्ब त्वरित कार्रवाई करते हुए साम्प्रदायिक सद्भाव बनाए रखने निमित युक्तियुक्त कार्रवाई कर कृत कार्रवाई से आयोग को सूचित किया जाय।
इस पत्र की प्रतिलिपि आवेदक मो० अशरफ, केवानी को भी सूचनार्थ भेजी गई है।
अब देखना है कि अल्पसंख्यक आयोग के इस सख्त पत्र के बाद जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।


