नशे के लिए भीख मांग रहे मासूम बच्चे:भीख में मिले पैसों के बदले मिलता है सलूशन-थिनर, 57 बच्चों को बचाया गया
हम भारती न्यूज से गोरखपुर जिला ब्यूरो प्रमुख धर्मेन्द्र कुमार श्रीवास्तव
गोरखपुर के मासूम बच्चे भीख मांग रहे हैं। यह भीख वे किसी मजबूरी में नहीं बल्कि कम उम्र में नशे की लत को पूरी करने के लिए मांग रहे हैं। इन बच्चों की उम्र महज 7 से 13 साल तक है। भीख में मिले पैसों से सलूशन, थिनर और नशीली गोलियां लेकर अपने नशे की लत को पूरी कर रहे हैं।
कुछ लोग इन मासूमों की नादानी का फायदा उठाकर कम उम्र में ही इन्हें पहले नशे का आदि बना दे रहे हैं और फिर बाद में इनसे भीख मंगवाकर उसके बदले में इन्हें नशीली चीजें देते हैं। यह चौकाने वाला मामला एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल (AHT) की कार्रवाई में सामने आया है।
नशे के दलदल से बाहर निकले 50 बच्चे
एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल की ओर से चलाए जा रहे अभियान के दौरान इधर दो महीने में 50 से अधिक बच्चों को बाल मजदूरी, भीख और नशे की लत से बाहर निकाला गया है। फिलहाल टीम इन बच्चों को चाइल्ड लाइन को सौंप चुकी है। इनमें से कुछ बच्चों को तो उनके परिवार को सुपुर्द कर दिया गया। जबकि कुछ, जिनके परिवार नहीं हैं, उनकी बकायदा काउंसलिंग कराई जा रही है। ताकि वे इस नशे की लत से बाहर निकल सकें।
चलाए जा रहे तीन अभियान
दरअसल, कोराना संक्रमण की वजह से शांत बैठी AHT टीम एक बार फिर एक्टिव हो चुकी है। AHT सेल 7-10 साल के मासूम बच्चों को नशे और भीख के दलदल से बाहर निकाल कर उन्हें नया जीवन दे रही है। इसके लिए टीम की ओर से 3 विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।
इसमे पहला, 'एक युद्ध नशे के विरूद्ध', दूसरा, 'बचपन बचाओ' और तीसरा 'भिक्षावृत्ति के खिलाफ अभियान' शामिल है। AHT टीम के प्रभारी इंस्पेक्टर जेएन शुक्ला ने बताया कि इधर लगातार टीम भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जा रही है।
वहां से ऐसे बच्चे जो बाल मजदूरी और भीख मांगते दिख रहे हैं, उन्हें रेस्क्यू कर बाहर निकाला जा रहा है। दो महीने की बात करें तो टीम ने 57 से अधिक बच्चों को बाल मजदूरी, भीख और नशे की लत से बाहर निकाला है।
इधर दो महिने की बात करें तो टीम ने 57 से अधिक बच्चों को बाल मजदूरी, भीख और नशे की लत से बाहर निकाला है।
57 बच्चों को रेस्क्यू कर बाहर निकाला
प्रभारी ने बताया कि अलग-अलग जगहों से 57 बच्चे बाल मजदूरी करते मिले। जिनके दुकान मालिकों को नोटिस भेज गया है। सीडब्ल्यू के सामने ये लोग नोटिस का जवाब देंगे। इसमें जिस पर भी दोष सिद्ध होगा उसके विरूद्ध मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
भीख के बदले देते हैं सलूशन
प्रभारी ने बताया कि शहर में घूमने वाले गरीब घरों के बच्चे सलूशन का नशा करते हैं। लगातार कार्रवाई होने के बाद सलूशन गोरखपुर में नहीं मिल पा रहा था। तब एक व्यक्ति बस्ती से सलूशन लाकर गोरखपुर में बच्चों को बेच रहा था। वो 20 रुपए के सलूशन बच्चों को 70 रुपए में बेचता था। शिकायत पर टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। उससे पूछताछ कर कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया।
अधिकांश गोरखपुर के बच्चे
इंस्पेक्टर जेएन शुक्ला ने बताया कि बाल मजदूरी और भिक्षावृत्ति में जो भी बच्चे मिलते हैं उसमे अधिकतर गोरखपुर के आस-पास के होते हैं। कुछ बच्चे बिहार झारखंड के भी मिलते हैं। लेकिन गोरखपुर के बच्चों की संख्या अधिक होती है।
चाइल्ड लाइन में रखते बच्चे
रेस्क्यू के बाद मिले बच्चों को चाइल्ड लाइन में भेज दिया जाता है। चाइल्ड लाइन की टीम बच्चों के घरवालों से बात कर उन्हें बुलाकर बच्चे को सौंप देती है। दोबारा फिर ना आए इसके लिए बच्चों के परिजनों को वार्निंग भी दी जाती है।
स्कूलों के पास से हटा रही नशे की दुकान
प्रभारी ने बताया कि एक युद्ध नशे के विरूद्ध अभियान के तहत स्कूलों के आस-पास 100 गज दूरी के अंदर से नशे से रिलेटेड पान, गुटखा, सिगरेट और शराब की दुकानों हटाया जा रहा है। ताकि बच्चे को नशे की लत ना लगे।
नशे की जद से बच्चों को निकाला जा रहा बाहर
AHT टीम के प्रभारी इंस्पेक्टर जय नारायण शुक्ला ने बताया कि बच्चों के लिए तीन अभियान चलाए जा रहे हैं। रेस्क्यू कर बच्चों को मजदूरी और भिक्षावृत्ति के दलदल से बाहर निकाला जा रहा है। कुछ बच्चे सलूशन के नशे की जद में आ चुके हैं। उन्हें भी सुधारा जा रहा है। अभी तक रेस्क्यू में जितने भी बच्चे मिले हैं, उनमें अधिकतर गोरखपुर से हैं।
