युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पावन पुण्य स्मृति में आयोजित सप्तदिवसीय व्याख्यानमाला के समापन समारोह
हम भारती न्यूज़ से गोरखपुर जिला ब्यूरो प्रमुख धर्मेन्द्र कुमार श्रीवास्तव
गोरखपुर आज दिनांक 07/09/2022 का विषय रहा "युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज द्वय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व" ।कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि, माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन करके किया गया। तत्पश्चात छात्राओं द्वारा मां शारदा की वंदना की गई। अतिथिजन का स्वागत महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ० सीमा श्रीवास्तव जी द्वारा किया गया । कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो०रविशंकर सिंह (अध्यक्ष भौतिक विज्ञान विभाग, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर)ने बताया कि संपूर्ण राष्ट्र नाथ योगियों का ऋणी है। नाथ योगियो ने समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, कुरीतियों, अंधविश्वास, सामाजिक विषमता की विष वेली का समूल नाश करके समरस समाज की स्थापना की। उन्होंने सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका सुनिश्चित की थी। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रो० शोभा गौड़ (अध्यक्ष एवं अधिष्ठाता, शिक्षा संकाय, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर)ने "युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ एवं राष्ट्र संत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज द्वय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व" विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि महंत दिग्विजयनाथ सामाजिक-शैक्षिक क्रांति के पुरोधा थे। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, शिक्षा, चिकित्सा, सामाजिक समरसता आदि समाज के प्रत्येक क्षेत्र में क्रांतिकारी योगदान दिया था। चौरी-चौरा क्रांति के नायक थे महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज। एक राष्ट्र शिल्पी के रूप में समाज के प्रत्येक क्षेत्र में देखा जा सकता है।एक अखंड भारत के सजग एवं सशक्त प्रहरी थे महंत दिग्विजयनाथ। महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज के योग्य शिष्य ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज सामाजिक समरसता के अग्रदूत थे। उन्होंने सम्पूर्ण भारतीय समाज को एकता के सूत्र बांधने के लिए समरसता आंदोलन चलाया था। रामजन्म भूमि आंदोलन, जिसमें काशी के डोम राजा, पटना के मंदिर में दलितों का प्रवेश आदि को उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है। महंत अवेद्यनाथ जी के कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं था। उनका व्यक्तित्व विराट था। वे सर्वसमाज के नेता एवं कुशल मार्गदर्शक थे। सम्पूर्ण भारतीय समाज उनका है। अध्यक्षता कर रहे हैं डॉ. शैलेंद्र प्रताप सिंह (पूर्व प्राचार्य, दिग्विजय नाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोरखपुर ) ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि ब्रह्मलीन महन्त द्वय भारतीय संस्कृति और सभ्यता के सजग प्रहरी थे, वासुदैव कुटुंबकम के अनुरागी थे। महन्त द्वय अलगाव और दूराव को सिरे से खारिज कर सर्वसमाज को एकता के सूत्र में जोड़ा। ब्रह्मलीन महन्त द्वय युवाओं को संदेश देते हुए कहते थे कि भावी भारत का प्रत्येक युवा अपने आप में समग्र भारत है। अतः राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक की भूमिका सुनिश्चित होनी चाहिए। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती हर्षिता सिंह तथा आभार सुषमा श्रीवास्तव जी के द्वारा किया गया। उक्त कार्यक्रम में समस्त शिक्षक/ शिक्षिकाएं एवं प्रवक्तागण तथा छात्राएं उपस्थित रहे।
