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सावन" में "खेतों" से उड़ रही धूलअन्नदाता" का बैठा जा रहा "कलेजा मौसम की बेरुखी ने बढ़ाई किसानों की मुसीबत

 सावन" में "खेतों" से उड़ रही धूलअन्नदाता" का बैठा जा रहा "कलेजा

मौसम की बेरुखी ने बढ़ाई किसानों की मुसीबत



हम भारती न्यूज से गोरखपुर जिला ब्यूरो प्रमुख धर्मेन्द्र कुमार श्रीवास्तव


एक माह पिछड़ गया मानसून!

35 फ़ीसदी भी नहीं हो पाया धान का आच्छादन!

नहरों में पर्याप्त पानी नहीं,सरकारी नलकूपों की दगाबाजी तथा महंगे डीजल ने बढ़ाई अन्नदाताओं की मुसीबत! 

151410 हे.खरीफ फसलों के सापेक्ष 11 फ़ीसदी ही हो सकी है बुवाई!

तेज गर्मी से किसानों को नर्सरी एवं रोपे गए धान को बचाने के पड रहे लाले! 

कृषि विशेषज्ञों ने माना पिछड़ गया मानसून,प्रभावित होगी पैदावार!

                

मौसम की बेरुखी ने किसानों की धड़कनों को बढ़ा दिया है।सावन के महीने में खेतों से उड़ती धूल मानसून की कहानी बताने के लिए काफी है।1 महीने विलंबित हुए मानसून का ही नतीजा है कि धान की फसल की रोपाई 35 फ़ीसदी के करीब ही हो सकी है और जो रोपाई की जा चुकी है उसे भी बचाने के लाले पडे  हैं। नहरों में टेल तक पानी ना पहुंचने महंगी सिंचाई एवं पर्याप्त बिजली की आपूर्ति ना होने से किसानों की समस्या और बढी हुई है। जिस तरह से मौसम ने बेरुखी दिखाई है उसी का नतीजा है कि खरीफ फसलों के 151410 हे.क्षेत्रफल के सापेक्ष महज 16786 हे.में 11फीसदी ही बुवाई की जा सकी है।यह तय है की पिछडी बरसात हो गई तो भी फसलों का उत्पादन 30 फ़ीसदी तक प्रभावित होगा।

      असमय ओलावृष्टि अतिवृष्टि एवं सूखे के शिकार किसान होते रहे हैं तो नहरों में पर्याप्त पानी ना आने,सरकारी नलकूपों की दगाबाजी एवं आसमान छूते डीजल के दामों के चलते महंगी सिंचाई करने के लिए किसान सदा ही मजबूर रहा है। फसल के पैदा होने के बाद अव्यवस्थाओं एवं बिचौलियों की घुसपैठ अन्नदाताओं की अपनी उपज को खुले बाजार में बेचने की मजबूरी रही है।। अब खरीफ फसलों के आच्छादन का पीक समय है तो एक बार फिर मौसम ने दगाबाजी दिखाई है हलांकि मौसम विज्ञानियों ने प्री-मानसून बरसात के साथ-साथ अच्छी बारिश की संभावना जताई थी लेकिन दिन-प्रतिदिन मानसून आगे बढ़ता चला गया और अब हालत यह है कि 1माह के करीब मानसून पिछड़ गया है।बरसात नहीं हुई है *इसका नतीजा है कि सावन के महीने में भी जहां झमाझम बारिश होनी चाहिए और खेत तालाब लबालब होने चाहिए वहां खेतों से धूल उड़ रही है और तालाब सूखे पड़े हैं।

     बारिश न होने से फसलों के आच्छादन में भी प्रभाव पड़ा है।खरीफ की प्रमुख फसल धान बासमती सुगंधित 350 हे.के सापेक्ष 129 हे.की रोपाई की जा सकी है।शंकर धान 35000 के सापेक्ष 13300 हे.तथा अन्य धान 48302हे.के सापेक्ष16422 हे.में रोपा जा सका है।इसके अलावा मक्का 348 के सापेक्ष 354 हे.,ज्वार 12032 हे.के सापेक्ष 9505हे.,बाजरा 7922हे.के सापेक्ष 1901हे.,उर्द 10107 हे.के सापेक्ष 909 हे.,मूंग 962 हे.के सापेक्ष 188 हे.में बोई गई है।अरहर 25653 हे.के सापेक्ष 12912 हे.,मूंगफली 362 हे.के सापेक्ष 28हे.तथा 13372 हे.के सापेक्ष 2540 हे.ही बोई जा सकी है। 83652 हे.धान की रोपाई के लिए 5577हे.में नर्सरी बोई जानी थी लेकिन नर्सरी को लक्ष्य से अधिक बोया गया।नर्सरी तो तैयार हो गई लेकिन तेज गर्मी के चलते उसे भी बचाने में किसानों को पसीना छूट रहा है।

      निजी संसाधनों से जो धान की रोपाई की जा रही है उसे भी तेज गर्मी के चलते बचाने में दिक्कतें हो रही हैं। नहरों में पर्याप्त पानी नहीं है।दोनों नहरों में 22सौ क्यूसेक के सापेक्ष 700 क्यूसेक पानी ही मिल रहा है।जो नाकाफी है।इसी का नतीजा है कि खेत सूखे पड़े हुए हैं।मौसम की इस बेरुखी से किसानों का दिल धड़क रहा है। जिला कृषि अधिकारी बृजेश कुमार सिंह का कहना है कि मानसून आगे निकल गया है 20 जुलाई तक अच्छी पैदावार के लिए धान की रोपाई हो जानी चाहिए लेकिन अभी 35 फ़ीसदी के आसपास ही धान की रोपाई की जा सकी है।तेज गर्मी के चलते धान की जड़े झुलस रहीं हैं।* पानी गर्म हो रहा है जिससे रोपी गई फसल को बचाने में किसानों को दिक्कतें हो रही हैं। *उन्होंने कहा कि जिस तरह से मानसून आगे निकल गया है उससे इतना तय है कि पैदावार में बडा अंतर आने वाला है।

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