हम भारती न्यूज़
मंडल व्यूरो चीफ राजेश्वर सिंह
संभल से खास खबर
जिलाधिकारी महोदय सम्भल की प्रेरणा से एक दिवशीय कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें जिलाधिकारी महोदय के साथ मुख्य विकास अधिकारी महोदय डीडी कृषि मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, जिले के सभी पशु चिकित्सा अधिकारी वन विभाग था जनपद संभल के सभी ब्लॉक के किसान बंधु उपस्थित रहे
आज की कार्य शाला में मुख्य वक्ता डॉ राकेश निहाल जी सचिव गो संवर्धन आश्रम मोकलावास जोधपुर से शिरकत की
आज की कार्यशाला में “प्रकृति, गौवंश और समाज का समन्वित विकास”
नमस्कार, वन्दे मातरम्।
आज हम सभी विभिन्न विभागों के अधिकारी, समाजसेवी और जागरूक नागरिक यहाँ एकत्रित हुए हैं। यह केवल एक बैठक नहीं है, बल्कि एक ऐसा अवसर है जहाँ से हम समस्याओं का समन्वित समाधान निकाल सकते हैं।
आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है —
👉 परस्पर पूरकता (Mutual Integration)
👉 प्रकृति के पंचमहाभूतों का शोधन
पंचमहाभूत — मिट्टी, जल, वायु, अग्नि और आकाश — ये केवल तत्व नहीं हैं, बल्कि हमारे जीवन का आधार हैं। यदि इनका संतुलन बिगड़ता है, तो समाज, स्वास्थ्य और पर्यावरण — सब प्रभावित होते हैं।
🔥 1. यज्ञ आधारित पर्यावरण शुद्धि
हमारे ऋषियों ने यज्ञ को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि वैज्ञानिक प्रक्रिया बताया है।
प्रत्येक अमावस्या और पूर्णिमा को
👉 मंदिर, गौशाला और सार्वजनिक स्थानों पर यज्ञ आयोजन
सामग्री: गोबर, घी, औषधीय लकड़ियाँ
यज्ञ की राख का जल में प्रयोग → जल शुद्धिकरण
👉 इससे वायु शुद्धि, वर्षा संतुलन और रोग नियंत्रण में सहायता मिलती है।
👉 आवश्यकता अनुसार वृष्टि यज्ञ भी आयोजित किए जा सकते हैं।
🌱 2. 14 एकड़ का समन्वित गौ-आधारित मॉडल
कल्पना कीजिए एक ऐसा मॉडल—
14 एकड़ भूमि → 14 प्लॉट (प्रत्येक 1 एकड़)
हर प्लॉट में 5 दिन → 50 गायों की नियंत्रित चराई
70 दिन में पूरा चक्र पूरा → फिर पुनः पहले प्लॉट में वापसी
👉 परिणाम:
भूमि स्वतः उर्वर बनेगी
घास, पेड़, लताएं प्राकृतिक रूप से विकसित
गोबर-गोमूत्र से जैविक उर्वरता
यह एक Self-Sustaining Ecosystem Model बन सकता है।
🌳 3. जंगल-चरागाह विकास मॉडल
वर्ष में 4 महीने (चातुर्मास) → चराई बंद
8 महीने → नियंत्रित चराई
👉 इससे:
बीज बनने का पूरा समय मिलता है
वनस्पतियों का प्राकृतिक विस्तार होता है
जंगल स्वतः पुनर्जीवित होते हैं
आज जंगल खत्म होने का बड़ा कारण है —
❌ बीज बनने से पहले चराई
इस मॉडल से यह समस्या समाप्त हो सकती है।
🐄 4. गौवंश नस्ल संवर्धन
अच्छी नस्ल के नंदी (बैल) का चयन
बछड़ों को पर्याप्त पोषण
आयु के अनुसार वर्गीकरण:
2 वर्ष, 4 वर्ष, 6 वर्ष, 10 वर्ष…
👉 पशुपालन विभाग, गौशाला और किसान मिलकर
सिस्टेमेटिक ब्रीडिंग प्रोग्राम चला सकते हैं।
👉 इससे:
दूध उत्पादन बढ़ेगा
स्वस्थ गौवंश तैयार होगा
बांझपन की समस्या घटेगी
🚜 5. गोबर, चारा और कचरा प्रबंधन
आज सबसे बड़ी समस्या है — ट्रांसपोर्टेशन
👉 समाधान:
Two-way system
जाते समय → गोबर
आते समय → चारा
👉 नगर निकाय:
कचरे का वर्गीकरण
कंपोस्ट निर्माण
मिट्टी (रेत) को खेतों में उपयोग
👉 इससे:
लागत घटेगी
कृषि उर्वरता बढ़ेगी
🌿 6. बहु-स्तरीय वन (Multi-layer Forest Model)
वन विभाग को चाहिए—
केवल एक प्रकार के पेड़ (Monoculture) नहीं
बल्कि:
पेड़ + झाड़ियाँ + घास + लताएँ
👉 विशेष पौधे:
बड़, जामुन, सहजन, निर्मली
👉 लाभ:
परागण करने वाले कीट बढ़ेंगे
फल और उत्पादन बढ़ेगा
जैव विविधता मजबूत होगी
💧 7. जल प्रबंधन और प्राकृतिक शुद्धिकरण
छोटे-छोटे तालाब निर्माण
वर्षा जल संचयन
जलीय जीवों का संरक्षण
👉 पेड़-पौधों के पत्ते और फल →
मछली, मेंढक, कछुए का भोजन + जल शुद्धि
👉 यह एक Natural Water Treatment System बन सकता है।
🎓 8. प्रशिक्षण और जन सहभागिता
हर मॉडल तभी सफल होगा जब—
👉 लोग समझेंगे
👉 लोग जुड़ेंगे
स्कूल/कॉलेज में वाटिका
गौशाला में लाइव डेमो
पर्यावरण शिक्षक की नियुक्ति
👉 “देखो – समझो – अपनाओ” मॉडल
💼 9. स्वावलंबन और रोजगार
स्थानीय उत्पादों से रोजगार—
सांगरी, केर → प्रोसेसिंग, अचार
गौ-आधारित उत्पाद
हर्बल उत्पाद
👉 इससे:
ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत
पलायन कम
🤝 10. विभागों का समन्वय
इस पूरे मॉडल में मुख्य भूमिका—
वन विभाग
पशुपालन विभाग
स्थानीय प्रशासन
गौशालाएं
NGO
👉 जब ये सभी मिलकर काम करेंगे
तो एक सतत विकास मॉडल तैयार होगा।
🌍 समापन
आज आवश्यकता है—
👉 सोच बदलने की
👉 प्रकृति के साथ चलने की
👉 और मिलकर काम करने की
यदि हम इन मॉडलों को अपनाते हैं,
तो हम केवल पर्यावरण नहीं बचाएंगे—
👉 बल्कि एक स्वस्थ, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करेंगे।
धन्यवाद। वन्दे गौ मातरम्। 🙏

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